माँ के लिए क्या करें जब वह बीमार हों यानि ऐसा नेक ख्याल, ऐसा दिली प्यार और जीजान से करने का जज्बा हृदय में हों, तो यह भावना स्वयं में ही इतनी उत्कृष्ट और रूह को छूनेवाली है कि माँ को जल्दी ठीक होना ही होगा।

माँ अगर बीमार हो जाएँ तो घर अस्त-व्यस्त हो जाता है पर जब बच्चे करने वाले हो तो यह उनको अपनी जिम्मेदारी का अहसास भी कराता है।जीवन में माँ के रूप में और एक बेटी के जो अनुभव है उनको आप संग यहां साँझा कर रही हूँ।

 माँ के लिए क्या करें जब वह बीमार हों

माँ के लिए क्या करें जब वह बीमार हों,सेवाभाव,अपनेपन की संजीविनी बूटी दें ऐसी कि फिर वह जल्द स्वस्थ हों 

 

माँ के लिए क्या करें जब वह बीमार हों पर 73 बेहतरीन तरीके 

1.

वह जीवन की प्राथमिकता हैं,अहसास कराएँ

माँ जोकि वास्तव में जिंदगी की प्रथम प्राथमिकता हैं,इसमें सौ प्रतिशत सच्चाई है और इसी सत्यता से माँ को अहसास कराना जरुरी है।बीमारी में मन भी थोड़ा कमजोर हो जाता है और ऐसे में जब माँ को यह प्यार भरी अनुभूति करवाई जाती है तो बीमारी झट से भागेगी।

 

2.

माँ की बीमारी में देखभाल करना एक दायित्वपूर्ण कार्य

माँ की बीमारी की देखभाल करना एक दायित्वपूर्ण कार्य होता है।माँ की बीमारी के समय उन्हें सहानुभूति, प्यार और समर्थन की जरूरत होती है, इसलिए उन के साथ होकर उनका समर्थन करें और उन्हें इस जंग में लड़ने की जरूरत का एहसास दिलाएं।माँ किसी भी हालात में निराश न होने पाएं।मुस्कुराते हुए ही उनकी सेवा करें।

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3.

आत्मीय बातचीत करें 

दवाई की तरह ही आत्मीय बातचीत अपना गहरा असर डालती है। माँ जो मीठी शहद सी बोली बोलने के लिए जानी जाती है और जब बच्चे उसी प्रकार बात करते हैं तो उन्हें बेहद सुकून मिलता है कि उन्होंने सही परवरिश और सेवा भाव सिखाया है।यह आत्म-संतुष्टि,गर्व की फीलिंग बीमारी के समय बहुत काम आती है।

 

4.

ईश्वर से प्रार्थना करें 

माँ के लिए सच्चे मन से ईश्वर से प्रार्थना करें। प्रार्थना में,दुआओं में बहुत शक्ति होती है।दुनिया में अनेक चमत्कार इन्ही प्रार्थनाओं से हो पाते है।माँ स्वयं प्रभु की साधना बहुत तन्ममयता से करती आई है अपने बच्चों के लिए,परिवार की खुशियों के लिए।आज आपकी बारी है पूरे मनोयोग से माँ के जल्दी ठीक होने के लिए अपनी पुकार रब तक पहुंचाएं।

 

5.

प्यार वाली झप्पी दें

प्यार वाली झप्पी सच में ही जादू सा असर लिए हुई होती है जिसमें देने वाला और लेने वाला दोनों ही अंदरूनी ख़ुशी महसूस करते हैं।तो देरी क्यों माँ की झप्पी लें, बहुत सारा प्रेम आँखों में भर के ताकि माँ बीमार पड़ें ही नहीं और हो भी जाएँ तो जल्दी से ठीक भी हो जाएँ।

 

6.

उनके अतुलनीय योगदान के प्रति आभार जतायें

माँ के निस्वार्थ त्याग और समर्पण की जितनी भी प्रशंसा कर दी जाएँ वह हमेशा ही कम रहेगी क्योंकि आज तक उस सीमा तक कोई भी पहुँच ही नहीं पाया है और न ही पहुँच पायेगा।माँ के बिना जीवन की कल्पना भी निरर्थक होगी।माँ के अतुलनीय योगदान देने के लिए दिल से आभार जताइए।

 

7

माँ के साथ क्वालिटी समय बिताएं 

माँ को शिकायत रहती है कि अब बच्चे इतने व्यस्त हो गए है कि माँ के पास बैठने का समय ही नहीं होता उनके पास।माँ बीमार हैं तो उनके लिए अब तो वक्त निकालिए और उनका दिल प्यार से भर दीजिये।बच्चों का सामीप्य स्वयं में एक औषधि की तरह कार्य करती है।

 

8.

भावनात्मक सहारा दें

जब माँ के पास बैठे हैं तो उन्हें अपनापन भरा भावनात्मक सहारा लगना चाहिए और स्वयं को सौभाग्यशाली मानें कि आप को ऐसी ममता मयी जननी मिली है जो आप से कुछ ओर नहीं सिर्फ आपके साथ कुछ पल गुजारना चाहती हैं।माँ का हाथ थाम उन्हें अपने होने का अहसास कराइए।

 

9.

चिंताओं पर बात करें

यह उचित समय होगा जब आप में से उन्हें आखिर कौन सी ऐसी बात या परेशानी है जो उनका दिल दुखाती है और वह बीमार भी हो गयी। जब आप की बात में एक सवेंदना झलकती है तो माँ भी हो सकता है अपनी समस्या को खुल कर कहें।जानने की पहल तो करिए।

 

10.

बीमारी से घबराये नहीं

माँ की बीमारी जान कर ना तो स्वयं घबराएँ और ना ही माँ को होने दें क्योंकि बीमारी से कई बार मन बहुत बैचैन हो उठता है जबकि बीमारी इतनी बड़ी होती ही नहीं।माँ को तसल्ली दें कि अति शीघ्र वह स्वस्थ हो जाएँगी और फिर से पहले जैसी ही स्थिति बन जाएँगी।

 

11.

स्नेहभरा व्यवहार दिखाएँ

व्यवहार में एक स्नेह एक कर्तव्य बोध की भावना झलकनी चाहिए।कहते हैं कि आधी बीमारी तो मीठी बोली में हाल चाल पूछने से ही ख़तम हो जाती है।अपने तौर तरीकों में बेहद प्रेम और विनम्र भाव दिखना चाहिए।माँ की बीमारी तो एकदम से छूमंतर हो जाएगी।

 

12.

योग्य डाक्टर से संपर्क करें

अगर डाक्टर को दिखने की जरूरत महसूस होती है तो बिना देर किये माँ को दिखाएँ।एक तो डाक्टर से मिल कर वह भी आश्वस्त होंगी कि ऐसा कुछ डरने की बात नहीं है और यह मनस्थिति उन्हें ठीक होने में बहुत बड़ा काम करेगी।योग्य डाक्टर से संपर्क करें।

 

13.

डाक्टर की सलाह का पूरा ध्यान रखें

डाक्टर से सिर्फ मिलने से ही काम नहीं होगा बल्कि उन्होंने जो सलाह या उपचार बताया उस पर पूरी तरह से अमल करना बेहद आवश्यक है।डाक्टर की सलाह का पूरा ध्यान रखें।खान पान और दवाइयां जो भी लिखी हों और जैसे भी लेनी हो उसे ठीक से समझ कर पालन करें। 

 

 14.

दवाइयों की सूची बनाएं 

दवाइयां कई बार उस समय लगता है कि सब समझ आ गया है पर बाद में थोड़ा भूल सा जाते हैं।ऐसे में आप पूरी दवाइयों की एक लिस्ट बना कर उसमें सुबह,शाम व रात्रि में कब-कब लेनी है,सब कुछ लिख लीजिये ताकि कोई गलती न हो।सही समय को लिख लेने से आपकी अनुपस्थिति में माँ स्वयं भी ले सकती हैं। 

 

15.

दवाई समय पर दें

अब लिस्ट तैयार है और सही ढंग से किस-किस समय देनी है वो भी आपने लिख दिया है तो बस अब तो माँ की बीमारी खुद ही वहां से दौड़ लगाने के मूड में आ जाएगी क्योंकि सही समय पर दी गई दवाई से माँ को जल्दी ठीक होने से भला कौन रोक सकता है।

 

16.

आत्म विश्वास बढ़ाने वाली बातें करें

माँ से आत्म विश्वास बढ़ने की बात करें ताकि पॉजिटिव रूप से दवाई लेने का असर भी जल्दी हो।बीमार  व्यक्ति की मजबूत इच्छाशक्ति से बड़े-बड़े रोग बिलकुल ठीक होते हुए देखे गये हैं।माँ को दवाई देते हुए उनका होंसला लगातार बढ़ाते रहिए और इच्छानुसार माँ को जल्द स्वस्थ पाइए।

 

17.

माँ को स्पेशल महसूस कराएँ

माँ की जिंदगी में जैसे आप हैं और ठीक वैसे ही आपकी जिंदगी में सबसे पहले माँ हैं।माँ को स्पेशल महसूस कराएँ।उनकी बीमारी के बारें में आस्श्वस्त करने करें कि कोई सीरियस बात नहीं है और गर होगी तो आप हैं उनके साथ।माँ को स्पेशल महसूस कराएँ।इस सहानुभूति पूर्ण शब्दों से माँ को बहुत अच्छा और स्पेशल फीलिंग भी महसूस होगी।

 

18.

आगे स्वस्थ रहने का लक्ष्य रखें 

माँ को यह भी बताते रहना है कि बस यह अंतिम बार ही है जो आप बीमार हुई हैं अब आगे आपने हर हाल में डाक्टर की सलाह का ध्यान रहना है और बीमारी नाम की इस कष्टदायक परिस्थिति से दूर ही रहना होगा।माँ भी अपनी तरह से जरुर सब बातों का ध्यान रहेंगी।

 

19.

हर बात को दिल पर न लेने का संकल्प करवायें

माँ को अब यह बताने की जरूरत हैं कि आखिर कौन सी बातें हैं जो उन्हें बीमार कर देती हैं जैसे -घर में हर किसी की बात को दिल पर लेने की क्या जरूरत है और वो भी तब जब आप इनके साथ पूरे मन से साथ हैं।बस अब आगे किसी भी बात को दिल पर नहीं लगाना है।

 

20.

अतिसोच वाली आदत को बदलने पर ज़ोर दें

माँ भी अन्य महिलाओं की तरह हर बात को बेहद संजीदगी से ले लेती है और न जाने क्या-क्या सोचती रहती हैं।सिर्फ इस आदत की वजह से दिल -दिमाग दोनों थके से रहते हैं और बेवजह तनाव की शिकार हो जाती है परिणामस्वरूप उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर आता ही आता है।माँ आप को थोड़ा बदलना होगा हमारे लिए।

 

माँ की बीमारी में देखभाल करने के अचूक उपाय 

 

21.

जीवन शैली में परिवर्तन की ज़रूरत समझाएँ

माँ को यह समझाने की बहुत जरूरत है कि अपनी जीवनशैली में थोड़ा सा परिवर्तन करते रहना चाहिए जैसे-सबके खाने के बाद ही वह खाना खायेंगी और जो बचा हुआ होगा उसी में संतोष कर लेंगी।ऐसा क्यों माँ-आपका स्वस्थ रहना सबसे ज्यादा जरुरी है क्योंकि आप पूरे घर की मुख्य धुरी हैं। सबके बाद नहीं सबके साथ खाइए।

 

22.

दृढ़ता से उनके साथ दिखाई दें

हो सकता है कि उपचार के दौरान किसी टेस्ट में कोई चिंताजनक बात दिखाई दे तो भी आप नार्मल दिखने चाहिए और जब भी माँ को डाक्टर के पास ले जाना हो या घर में कोई भी जरूरत दिखे तो सर्वप्रथम उनके पास ही दिखने चाहिए ताकि वह नार्मल ही सब समझें।

 

23.

अकेलापन न महसूस होने दें

बीमारी में अक्सर परेशानी न हो या कई बार नींद न डिस्टर्ब हो,यह सोच कर माँ को अकेला छोड़ने का विचार आ सकता है.वो बात ठीक है पर बीच-बीच में उन्हें देखते रहना आवश्यक है।व्हाट्स एप्प के द्वारा मेसेज भी भेजे जा सकते हैं।माँ को यह न लगे कि वो बीमार क्या हुई सब तो बस अपने काम में ही व्यस्त हैं।

 

24.

माँ से धीमी आवाज़ में बात करें

माँ से वैसे भी धीमी आवाज़ में बात करनी चाहिए और जब उनकी तबियत नासाज हो तो इस बात का खास ध्यान रखना होगा क्योंकि बीमारी में तेज आवाज़ से माँ को दिक्कत होगी,अब जिस बात से परेशानी हो तो वह बिलकुल भी नहीं करनी चाहिए।धीमी और मृदुल तरीके से बात करें।

 

माँ की नींद में बाधा न आने पाएं

बीमारी की अवस्था में नींद अपनेआप एक औषधि का काम करती है जिसके लिए घर में सबको ध्यान रहना चाहिए।आप स्वयं भी ओर बाकि सदस्यों को भी इस बारें में अवगत कराएँ और एक मीठी नींद में माँ को सोने दें।उनकी बीमारी डर कर खुद ही भागने लगेगी।

 

घर में शांत माहौल रखें 

घर में शांति बीमार माँ को जल्द स्वस्थ रखने में बहुत कारगर सिद्ध होगी।यदि घर में छोटे बच्चे हैं तो उन्हें भी सिखाने का यह सही समय है कि जब कोई भी बीमार हो तो शांति रखना कितना जरुरी है और इससे घर के बाकि लोग भी अपनी जिम्मेदारियों को समझ पायेंगे व मिलकर ध्यान रखेंगे।

 

माँ की समस्या को समझें  

माँ अगर कुछ अपनी समस्या जैसे किसी दवाई को लेने में परेशानी हो,कोई बात जिसकी वजह से माँ बीमार हुई है या हो जाती हैं,बताना चाह रहीं हैं तो उस को पूरे मनोयोग से सुनें और उस पर अपना सर्वाधिक सहयोग जो भी दे सकतें हैं,जरुर दें,सिर्फ सुनने भर से भी बीमारी दूर हो जाती है।

 

28.

माँ से बहसबाजी से बचें

माँ जब कुछ बता रही होती है तो आदत के अनुसार आप माँ से बहस में लग जाते हो और यह बात माँ की तबियत को ओर ज्यादा भी बिगड़ सकती है।ऐसा न करें सिर्फ सुने न कि किसी भी प्रकार के तर्क-वितर्क से माँ की बीमारी को ओर बढ़ाएं।खुद पर कण्ट्रोल रखें।

 

29.

धैर्यशील श्रोता बनें

माँ बीमार है तो यह ओर भी आवश्यक है कि धैर्यशील बनें।हो सकता है कि आप माँ की बात से असहमत हों ओर अपनी बात या पक्ष को रख कर गलतफहमी को दूर करना चाह रहें हों पर माँ मानसिक रूप से उस समय उस बात को सुनने के मूड में बिलकुल भी नहीं होती है,धैर्य से सुने बस।

 

30.

माँ की बीमारी के बारे में डाक्टर से विस्तृत जानकारी ले

माँ की आखिर क्या बीमारी है क्यों हुई और आगे भविष्य में न हों तो इस बारें में डाक्टर से विस्तृत जानकारी लें और गूगल पर भी पढ़ सकते हैं।आगे क्या क्या ध्यान रखना है यह सब आपको पता करना है और माँ को आश्वस्त करते हुए यह सब बताना है कि बस बहुत आसानी से इस बीमारी पर कैसे काबू करना हैं।

 

 

उन्हें ठीक होने के लिए प्रोत्साहित करें

अपनी सेवा और मीठी बोली से माँ का दिल जीत लें और बातों ही बातों में उन्हें स्वस्थ होने के लिए प्रोत्साहित करें भी।बच्चों की बातें माँ को अक्सर कम बुरी लगती हैं।जब आप उन्हें आगे ठीक रहने पर जोर देंगे तो वह भी जरुर सोचेंगी कि और वह भी पूरा प्रयास करेंगी।

 

32..

नकारात्मकता को दूर रखें 

बहुत बार मिलने आने वाले लोग अपने अनुभवों को बताने लगते है ओर जाने-अनजाने यह जता जाते हैं कि डाक्टर को बदल लो तो कभी अपने इलाज कहाँ-कहाँ कराएँ है वहां जाने पर जोर देने लगते हैं जोकि बिलकुल भी ठीक नहीं है क्योंकि बीमार माँ का मन ओर ज्यादा परेशां हो जाएगा।

 

33.

रायचंद जैसे लोगों से दूर रहें 

कई लोगों की यह बहुत बुरी आदत होती है कि अपनेआप को माहिर जताने में लग जाते है तो कुछ तो बाकायदा अपने इलाज पर ही जोर डालते हुए माँ को अपनी बात से यह मनवाने पर लगे रहेंगे कि डाक्टर तो कुछ आता-जाता नहीं बस वही सबसे ज्यादा होशियार है।ऐसे रायचन्दों से खुद को और माँ से भी दूरी बना कर रखें।

 

कोई प्रेरक किताब पढने के लिए दें 

बीमारी की अवस्था में बेहतर है यदि कुछ पढ़ने का मन हो तो प्रेरक किताबें अध्ययन के लिए दें जो माँ को एक नयी दिशा दिखाएँ जिसमें आगे का रास्ता कठिन हो सकता है पर मानसिक तौर पर बेहद आशावान और नयी उम्मीदों से भर देगा।

 

35.

पसंद का संगीत धीमी आवाज़ में चलायें 

माँ की पसंद का संगीत उनके कमरे में धीमी आवाज़ में लगा दें जो उनके मन को शांति और सुरों से तृप्त करे।संगीत में ऐसी अद्धभुत और आलोकिक शक्ति होती है जो एक निराश हृदय में भी नवचेतना का अंकुर बो देता है व जिसकी शाख पर नयी कोंपल ले आएँगी ,माँ का मन संभलेगा और बीमारी दूर होगी।

 

36.

रूह को सुकून देने वाले गीत उन्हें सुनाएँ 

बचपन में माँ ने आपको मीठी लोरी सुना कर सुलाया था ।अब आप उनके द्वारा सिखाये गए गीतों से उनका मनोरंजन कर सकते है और सब घर के लोग एक छोटी सी महफ़िल सजा कर माँ को प्यार से अभिभूत कर सकते हैं।ऐसा सुंदर दृश्य तो किसी को भी भाव विभोर कर ही देगा।

 

37.

कमरे में साफ़ सफाई उचित रूप से करवाएं 

सफाई पसंद माँ के कमरे की सफाई रोज और सही तरीके से होनी चाहिए जिससे उन्हें अच्छा लगे क्योंकि जो साफ़ सुथरे ढंग से रहना चाहते हैं उनकी आधी बीमारी तो आसपास का वातावरण सुंगंधित और सुरुचिपूर्ण से सजा हुआ हो तो उन्हें बहुत ही अच्छा लगता है और ऐसी स्थिति में माँ अपनी बीमारी से जल्दी उबर पाएंगी।

 

38.

एक पेन और नोटपैड पास में रखें

माँ के पास टेबल पर एक नोटपैडऔर पेन रखें जिसमें माँ को जब ठीक लगे और जो भी उन्हें चाहिए वह उसमें लिख सकती हैं या आपको माँ को कुछ कहना है तो जब भी वह जागी हुई होंगी तो उस बात को पढ़ लेंगी।इससे अनावश्यक बात नहीं होगी क्योंकि बीमारी की अवस्था में कई बार बात करने में भी दिक्कत महसूस होती है। 

 

39.

एक घंटी पास में रखें

अक्सर माँ बीमारी में जब लेटी होती हैं और कोई भी कमरे में न हो तो कुछ समान लेने के लिए आवाज़ लगाना भी मुश्किल लगता है तो ऐसे में एक घंटी माँ के बिस्तर के बिलकुल समीप रख दें या लगा दें ताकि वो जरूरत के अनुसार उसका इस्तेमाल करके किसी को बुला पाएं।

 

40.

टिश्यू पेपर रखें

टिश्यू पेपर का एक पैकेट या कुछ पेपर्स माँ के समीप रख दें ताकि वह जब भी कुछ खाएं या पियें तो अनजाने में कई बार हाथ से कुछ गिर जाने पर या यूँही मुँह को साफ़ करने के लिए छोटा तोलिया या टिश्यू पेपर बहुत कारगर सिद्ध होते हैं।हमेश वहां पर्याप्त मात्रा में टिश्यू पेपर रहने चाहिए।

 

माँ की बीमारी में विशेष ध्यान देने योग्य सुझाव 

 

41.

पानी का गिलास और बॉटल पास में रखी होनी चाहिए

पानी का गिलास जोकि एक छोटी प्लेट से हमेशा ढंका हुआ होना चाहिए और बिलकुल नजदीक भी हो और साथ में पानी की बोतल जो मौसम के हिसाब से गरम व् ठंडी हो,पास में ही रखी हुई हो ताकि किसी के कमरे में न होने पर भी माँ स्वयं ले पाएं।यह छोटी-छोटी बातें माँ को अच्छी लगेंगी।

 

42.

टी वी रिमोट कंट्रोल को पास में रखें

टी वी रिमोट कंट्रोल को भी माँ के बिस्तर पर ही या टेबल पर बिलकुल नजदीक रखें क्योंकि कई बार लेटे-लेटे बोरियत भी हो जाती है और कुछ अपने पसंद के प्रोग्राम देखने से मन भी बहल जाता है।वैसे तो बहुधा माँ को टी.वी देखने की फुर्सत होती ही नहीं ऐसे में स्वास्थ्य सम्बंधित प्रोग्राम से जानकारी भी बढती है। 

 

43.

गरम पानी बॉटल या हीटर पैड में सहायता करें

बिमारी में अक्सर कहीं दर्द की शिकायत होने पर गरम पानी की बोतल से सिंकाई एक आम तरीका है जो लगभग हर घर में अपनाया जाता है।आजकल वैसे हीटर पैड  भी कई तरह के मिलते हैं जिनके इस्तेमाल से बीमार माँ को आराम की अनुभूति होगी और वह जल्द ठीक होने के सफर पर अग्रसर हो जाएँगी।

 

44.

उनकी सहेलियों को बुला सकते हैं

बीमार माँ तो स्वभाव से ही बहुत मिलनसार और बातचीत में माहिर हैं,उन्हें देर तक चुप बैठना बिलकुल भी पसंद नहीं हैं।हर किसी के सुख दुःख में शामिल होना उनकी पहचान है।बीमारी में कोई एक समय रख सकते हैं जिसमें आने आने वाले लोगों से माँ की मुलाकाल करवाई जा सकती है।माँ को यह व्यवस्था जरुर अच्छी लगेगी।

 

45.

ग़रीब बच्चों से मिलाएँ

माँ की आदत कुछ ऐसी है कि किसी की मदद करना उन्हें सदा ही भाता है।कई संस्थाओं से माँ बहुत दिल से जुडी हुई हैं जहाँ जाकर उन्हें बेहद सुकून और आंतरिक ख़ुशी महसूस होती है।ऐसे में माँ की बीमारी में अगर वहां के बच्चे माँ के नाम कोई सन्देश या फूल या हाथ से बना हुआ कार्ड भेंजेगे तो माँ एकदम से ठीक हो जाएँगी।

 

46.

इनडोर गेम्स खेल सकते हैं 

बीमारी में कई बार लेते लेते मन नहीं लगता है ऐसे में कोई इनडोर गेम्स थोड़ी देर के लिए खेल सकते हैं जैसे लूडो,स्नेक लैडर,अन्ताक्षरी आदि जिससे मन भी बहल जाएगा और बीमारी में समय भी कट जाएगा।माँ जैसी एक्टिव महिला के लिए बीमारी एक सजा सी बन जाती है क्योंकि आराम करना तो माँ ने सीखा ही नहीं था। 

 

47.

अपनी रुचि के कामों को जानें 

माँ के पास जब लगे कि तबियत में सुधर हो रहा है तो उनकी रूचि जानने की कोशिश करें ताकि ठीक होने पर उन्हें उनकी रूचि वाले कार्य करने के तरीके बता सकते हैं,निसंदेह माँ को यह हर हाल में भायेगा कि उनके बच्चे कितने समझदार और काबिल है जो उनके लिए कितना अच्छा सोचते हैं। 

 

48.

उनके लजीज़ खानों को मिस कर रहे है,याद दिलाएँ

माँ दुनिया की सबसे बढ़िया शेफ ही जिनके हाथों से बने खाने का कोई कहीं पर मुकाबला है ही नहीं। अब मौका है जो आप सोचते रहते हो अब उस बात को माँ तक पहुंचाएं भी। याद दिलाएं कि माँ जल्दी से दुरस्त हो जाइए क्योंकि आप उनके द्वारा बनाये हुए लजीज व्यंजनों को बहुत मिस कर रहें हैं। माँ को तो अब ठीक होना ही होगा। 

 

49.

ढोंगी बाबा लोगों के चक्कर में न पड़ें,ध्यान दें 

माँ यूँ तो बहुत मजबूत मनस्थिति की महिला हैं पर कई बार जब शारीरिक रूप से कमजोर होते है तो चतुर बाबा जैसे ढोंगी लोग इस बात का फायदा भी उठा लेते हैंढोंगी बाबा लोगों के चक्कर में न पड़ें,ध्यान दे आप को माँ को लगातार मानसिक रूप से स्ट्रोंग बना कर रखना है ताकि वो इस ओर ध्यान दें, ढोंगी बाबा लोगों के चक्कर में न पड़ें,ध्यान दे।

 

50.

माँ के ग़ुस्सा करने पर रियेक्ट न करें

कई बार बीमारी में इन्सान थोड़ा चिडचिडा सा हो जाता है और गुस्सा भी कर देता है।आप को यह समझना जरुरी है कि कमजोर तन मन से शक्ति को खोया हुआ होता है और न चाहते भी अपनों पर ही कुछ तेज बोल जाता है।शांत रहें और गुस्से पर रियेक्ट करने की बजाय आराम से पूछें।

 

51.

माँ की बगिया को पानी देने की  ज़िम्मेदारी लें

बीमार माँ को जब आप यह बताएँगे कि उनकी प्रिय जगह यानि उनकी अपनी बगिया एकदम से हरी-भरी है और कोई भी पौधा मुरझाया नहीं है और न ही टूटा है हाँ बस उनके पेड़ पौधे माँ को याद कर रहें है।आप यकीं नहीं करेंगे कि बीमारी में भी माँ के चेहरे पर एक सुकून और ख़ुशी दिखाई देगी।करके देखिये।

 

52.

माँ के सिर की मालिश करें

माँ के पास बैठे-बैठे उनके सिर में हल्की-हल्की तेल की मालिश करके देखिये,माँ के सिर की मालिश करें।माँ  को जो चैन की नींद आएगी उसका असर उनकी सेहत व् उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा आएगा।लगे हाथ उनके पैरों में भी तेल लगा सकते हैं।एक गहरी लम्बी नींद लेने के लिए माँ को अब सोने दें।

 

53.

फूलों के गुच्छे से कमरा सजाएँ 

माँ को बीमारी से निकलने के लिए हर रोज एक छोटे से फूलों के गुच्छे से कमरे को महकाते रहिए।माँ की बगिया में जो फूल नीचेगिर जाते है उन्हें उठा कर एक फूलदान में लगा कर रख सकते हैं।जाहिर सी बात है माँ का लगाव इन सब फूलों से ज्यादा होगा ही क्योंकि यह खुद उनके हाथों से लगी फुलवारी के न्यारे-न्यारे पुष्प जो हैं।

 

54.

माँ के बचपन की बातें करें

माँ जब बीमार हैं तो उनके पास बैठ कर माँ के बचपन की ढेर सारी बातें हो सकती हैं जिनमे माँ बहुत उत्साह से अपने खेलों,अपनी सखियों,अपने स्कूल की अपने सपनों की और न जाने कितनी बातें बतायेंगी जिनको सुनने के लिए आम तौर पर किसी के पास वक्त होता ही नहीं है।माँ से बातें करिए और जल्दी ठीक करिए।

 

55.

ऐतिहासिक कहानियाँ सुनाएँ

माँ से जब ऐतिहासिक कहानियों की बातें पूछते है या बताते है तो माँ को अच लगेगा कि बच्चे अपने इतिहास या विश्व के बारें में कितनी ज्यादा जानकारी रखते हैं या जानना चाहते हैं।माँ से उनके पसंद की इतिहास की भूली बिसरी घटनाएँ और किस्से सुनिए।माँ जल्द ठीक हो जाएँगी,बिलकुल पक्की बात है।

 

56.

हल्का खाना खिलाएं 

 बीमारी में शरीर कमजोर हो जाता है तो ऐसे में माँ को हल्का और जल्दी पचने वाला खाना दिया जाना चाहिए जो पोषण से भरपूर और सहायक आहार हो जैसे -शाकाहारी भोजन।  रोग से लड़ने की शक्ति को बढ़ाने में शाकाहारी भोजन लाभदायक रहता है जैसे पालक,लौकी, टमाटर,तोरई,मुंग की दाल  आदि ।

 

57.

फल खूब खिलाएं

 फलों में अनार,सेब,मौसमी,संतरा केला बीमारी में सहायक हो सकते हैं।विटामिन सी से भरपूर फलों के सेवन से शरीर में रोगों से लड़ने में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिलता है।सलाद मे हरे पत्तेदार सब्जियां फायदा पहुंचाती है और शरीर को उर्जा भी देती हैं।फलों की स्वदिष्ट चाट बना कर भी खिला सकते हैं। 

 

58.

प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ

जैसे दूध, दही,अंडे, मछली जैसे आहार होना चाहिए। उनकी मांसपेशियों को मजबूत करने व आंतरिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।जब तक अंदर से शक्ति नहीं मिलती है तब तक माँ स्वस्थ नहीं हो पाएंगी।शरीर में जब उचित रूप से खाद्य पदार्थ पहुन्व्हेंगे तो उनकी सेहत में सुधर स्वयं ही होने लगेगा।

 

59.

आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थ 

आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थ हमेशा से ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते आएं हैं। त्रिफला, अमला, गिलोय, और तुलसी का सेवन करना चाहिए।नजले या गला  ख़राब होने पर तुलसी,काली मिर्च,अदरक शहद का काढ़ा और ठंड लगने पर गरम दूध में हल्दी मिलाकर पिलाना चाहिए ।

 

60.

पानी पिलाते रहें 

 शरीर में पानी की मात्रा यदि सही बनी रहें तो बहुत सी बीमारियाँ पास नहीं आती, क्योंकि यह उनके शरीर को शुद्ध करने में मदद करता है और रोग के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है।सूप और जूस यह बहुत ही आसानी से पचने वाले,पोषक व माँ को ठंडक प्रदान कर सकते हैं और उनके आहार में पोषण बढ़ा सकते हैं।

 

बीमार माँ स्वस्थ रहें पर अनमोल उपाय 

 

61.

छोटे छोटे आहार देते रहें

माँ क्योंकि अभी बीमार हैं और आप चाह रहें हैं कि बस वह जल्दी से जल्दी ठीक हो जाएँ।बहुत अच्छा चाह रहें हैं परन्तु दुबारा स्वस्थ होने में समय लगता है।माँ को बजाय एक साथ काफी कुछ देने के छोटे-छोटे आहार देते रहिए,वैसे भी आजकल एक नयी विचार धारा के अंतर्गत छोटे-छोटे आहार को लेने पर जोर दिया जा रहा है।लम्बे समय तक भूखे रहने से निर्णय क्षमता पर असर आता है,ऐसा माना जा रहा है।

 

62.

फ़िटनेस के उपकरण घर में लाकर रखें

माँ की बीमारी में एक बात जो साफ़ निकल कर आती हैं वो है कि रोजाना अपनी सेहत के लिए ध्यान खुद देना होगा और साथ में कुछ ऐसे फिटनेस उपकरण घर में लाइए जिनके उपयोग से माँ स्वस्थ रहें जैसे-योग मैट,रस्सी कूदना,इनडोर साइकिल आदि के रोजाना इस्तेमाल से सेहत के लिए एक रूटीन बन जाएगा।

 

63.

स्मार्टवॉच से सेहत को चेक करने का उपाय बताएँ

स्मार्ट वाच एक ऐसा उपकरण है जिससे कई गतिविधि जैसे ट्रैकिंग यानि चलना,दौड़ना,साइकिलिंग,योग,हृदय दर,नींद की गुणवत्ता,तनाव स्तर को मापना,कितनी कैलोरी खर्च की आदि व् अन्य बहुत सी चीजों की जानकारी मिलती जाएगी।आज के समय की सबसे बड़ी मांग सेहत का सही रहना है और माँ की सेहत ठीक रखने में यह घड़ी बहुत काम की रहेगी।

 

64.

छोटे-छोटे प्रयासों की  तारीफ़ करें

माँ के हर छोटे बड़े प्रयासों की तारीफ जरुर करते रहें ठीक वैसे ही जैसे आपकी छोटी सी सफलता पर माँ आपका हमेशा होंसला बढाती थी।पहले दिन अगर दस मिनट म चलती हैं और दूसरे दिन बीस मिनट तो यह तो काबिले तारीफ बात हुई न।हिम्मत बढ़ाते रहिए।

 

65.

मी टाइम माँ के लिए ज़रूर हो,ध्यान दें

माँ के लिए उनका अपना मी टाइम होना बेहद आवश्यक है क्योंकि सुबह से लेकर रात तलक माँ को सांस ठीक से लेने की फुर्सत ही नहीं मिलती है और ऐसे में वह थकी होती है और अपने मन का कुछ करना चाहे तो वह भी नहीं कर पाती हैं।घर में सबसे बात करके माँ का मी टाइम जरुर फिक्स करें।

 

66.

योग की कक्षाएं ज्वाइन करवाएं 

माँ अब जब ठीक हो जाएँ तो उन्हें आसपास में अगर कोई योग की कक्षाएं लगती हों तो उसमे नियमित रूप से जाने का प्रबंध करें या ऑनलाइन भी ज्वाइन करवा सकते हैं,जिससे घर बैठे वह अपने हिसाब से कोई भी समय चुन कर योग को सही तरीके से सीख कर हमेशा स्वस्थ रह सकती हैं। 

 

67.

लाफ्टर क्लब में ले जाएँ 

माँ घर के कामों में इतनी उलझी रहती हैं कि हास्य जीवन का कितना अहम् भाग है वह भी भूल जाती हैं।सब खुश तो माँ खुश वाली स्थिति में वह प्रसन्न हैं पर खुद भी खुल कर हंसना चाहिए,नहीं कर पाती हैं तो ऐसे में किसी लाफ्टर क्लब या किसी अन्य सामूहिक कार्यकर्म में शामिल होकर कुछ पल खिलखिलाने के रख सकती है।

 

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पास के पार्क में ले जाएँ

घर के पास कोई यदि पार्क या खुली जगह हैं जहाँ लोगों का आना-जाना लगा रहता है वहां पर घूमने या थोड़ी देर बैठ कर प्रकृति के सौन्दर्य को निहारना भी माँ की सेहत को सदा दुरुस्त रखेगा और धीरे-धीरे उनका अपने रूचि के लोगों से मिलकर ग्रुप भी बन जाएगा।माँ को बहुत अच्छा लगेगा।

 

बेहतर संवाद कायम करें 

अच्छी सेहत को कायम रखने के लिए आपसी बातचीत एक दवा का काम करती है क्योंकि दिल की बहुत सी बातें या परेशानी एक दूसरे के संग शेयर करने से कम होती हैं और अधिकतर उनके समाधान भी मिलने लगते हैं।नयी पीढ़ी के मन की बात और पिछली पीढ़ी की परिस्थति दोनें के बीच अगर तालमेल ठीक से बन जाए तो कितना अच्छा लगेगा।

 

70.

छोटे-छोटे कामों में सहायता प्रदान करें 

माँ को थोड़ा आराम देने के लिए अगर आप और बाकि लोग उनके कार्यों में थोड़ा-थोड़ा सा भी सहयोग देने लगें तो उनके पास समय बचेगा जिसका वह बखूबी किसी अपनी पसंद के काम में इस्तेमाल करके खुश हो जाएँगी।तो बस आज ही घर के सब सदस्यों के साथ बैठ कर आगामी योजना बनाएं और काम का दायित्व आपस में बांटे।

 

71.

घर के पालतू जानवर का ध्यान रखें

माँ के साथ काम बाँटने की जब बात आती है तो घर में यदि कोई पालतू जानवर है तो उसकी देखरेख में अपना साथ जरुर दें और एक निश्चित जिम्मेदार आप लें जैसे-पालतू जानवर को रोजाना घुमाने ले जाना या किसी एक समय का खाना खिलाना,डाक्टर के पास उसे वेक्सिन लगवाने के लिए लेकर जाना।

 

72.

खुद को भी ठीक रखना जरुरी है 

माँ की सेवा आप पूरे मन से एकदम और प्यारे ढंग से मनोयोग से कर रहें हैं और ऐसे काबिल और सेवा करने वाले बच्चों की माँ बनना स्वयं में ईश्वर का वरदान है पर खुद भी अपनी सेहत को ठीक रखना बेहद जरुरी है क्योंकि आप अगर स्वस्थ नहीं होंगे तो माँ की देखभाल कौन करेगा।

 

73.

माँ के स्वस्थ होने पर ईश्वर को धन्यवाद दें 

आपके अथक प्रयासों और परमात्मा की असीम अनुकम्पा से माँ जब पूर्ण रूप से ठीक हो जाएँ और फिर से सामान्य होकर दिनचर्या में ढल जाएँ तो ईश्वर को सामूहिक रूप से दिल से धन्यवाद जरुर दें,क्योंकि रब की इच्छा के बिना दुनिया में कुछ भी कार्य संभव नहीं हो पाता है।

माँ के लिए क्या करें जब वह बीमार हों,इस विषय पर अनेकों तरीको द्वारा यह बताने का प्रायस किया गया है।माँ के लिए क्या करें जब वह बीमार हों पर अनमोल विचार जरुर पढ़िए और COMMENT BOX में अपनी अमूल्य राय से भी अवगत करवाइए।