माँ को सशक्त कैसे करें?  माँ को उनके अंदरूनी ताकत का एहसास कैसे दिलाएं ? ऐसे सवाल यदि आपके मन में भी हैं तो आप माँ के प्रति समर्पित हैंI

मैं स्वयं एक माँ होने के नाते, आपको कुछ नेक उपाय बताना चाहूंगी।

 माँ-को-सशक्त-कैसे-करें|

माँ को सशक्त कैसे करें- आत्मविश्वास को है बढ़ाना,समाज की प्रगति में उनके योगदान की करवाना सराहना  

माँ के सशक्तिकरण के 35 सुंदर तरीके

1.

माँ का हर कदम पर आत्मंविश्वास बढ़ाने में सहयोग दें

माँ को सशक्त करने के तरीकों में सबसे पहले आता है उनके साथ रहकर उनकी आवाज को सुनना, उनकी  भावनाओं को समझना, और प्रोत्साहन प्रदान करना। ऐसा करने से आपकी माँ का आत्मविश्वास बढ़ेगाएक औलाद होने के नाते, आपका भावनात्मक समर्थन माँ के आत्म-संवाद को बढ़ावा देने में मददगार सिद्ध होगा।आपका पूर्ण समर्पण आपकी प्यारी माँ के होंसले को न सिर्फ बढ़ाएगा अपितु उनके सशक्तिकरण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाएगा।

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2.

माँ को प्रोत्साहन देने का कोई अवसर न गवाएं

माँ को सशक्त करने के लिए उनके शौक, पसंद तथा रुचियों को समझें। उनकी पसंद-पसंद जाने बिना आप माँ को पूर्ण रूप से समर्थन प्रदान नहीं कर पाएंगे।माँ का समर्थन तभी अच्छे से हो पाएगा यदि आप एक संतान होने के नाते उनकी प्राथमिकताओं और आकांक्षाओं को समझें।माँ का असली सशक्तिकरण बिना उनकी इच्छाओं के सम्मान किये हुए पूरा हो ही नहीं सकता।

3.

माँ दुनिया में सर्वोपरि है का अहसास कराना सबसे महत्त्वपूर्ण है 

माँ को निरंतर यह अहसास कराना कि दुनिया में वह ही आपके लिए सबसे पहले और सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि न सिर्फ वो जननी है बल्कि उन जैसी निस्वार्थ भावना,उच्चतम स्तर का त्याग-कोई कर ही नहीं सकता|बस एक नन्हीं बच्ची मान उन्हें ही आपका हाथ थामे रखना है|माँ के लिए यह बहुत ही सुखद अहसास होगा और एक ऐसा आत्म-विश्वास आ जाएगा कि उनके बच्चे उन्हें कितना चाहते है और उन्हें कितना ज्यादा मान देते हैं,यह सच भी है पर प्यार का अहसास कराना जरुरी है|

Rudyard Kipling ने कितना सही कहा है -”भगवान हर जगह नहीं हो सकता और इसीलिए उसने माँ को बनाया है”

4.

माँ को बराबरी नहीं घर में सर्वोच्च स्थान दिलाने में मजबूती से साथ देना 

सदियों से माँ को या कहिए हर नारी को समाज में दूसरा स्थान दिया जाता रहा है| पितृसत्तात्मक व्यवस्था में सेवा भाव उनके जिम्मे,शादी के बाद घर के हर सदस्य की जिम्मेदारी उनके कंधों पर जोकि हमेशा नाजुक व् कमजोर माने गए|माँ के सशक्तिकरण में यह बहुत ही अहम् बात है कि उन्हें किसी से पूछना नहीं अपितु अपना निर्णय बताना है| मातृशक्ति में ही घर की ख़ुशी छुपी है इस बात का सन्देश सब को मिलें इसमें उनके साथ खडें दिखना बहुत ही आवश्यक है|

5.

परम्पराओं का आदर तो ठीक है पर अन्धानुकरण उचित नहीं 

पीढ़ी दर पीढ़ी सदियों से परम्पराओं के नाम पर माँ को एक नारी के रूप में सदा ही छला गया है| जन्म से मृत्यु तक रीति रिवाजों की ऐसी कड़ी है, व्रत-उपवास में वो ही अपने पति या बच्चों के लिए लम्बी उम्र की,अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है पति या बच्चों को उनकी दीर्घ आयु की इच्छा करते हुए किसी ने देखा कभी? दिल के करीब सहेली सी माँ को यह बताना जरुरी हो जाता है कि आस्था तो ठीक है पर अन्धानुकरण किसी का नहीं करना है| व्रत-उपवास एक सीमा तक सेहत की दृष्टि से देखें तो ठीक है पर हर दूजे दिन- ना माँ ना|‘माँ आप है तो हर दिन त्यौहार है वर्ना लगता सब बेकार है|

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6.

देश दुनिया से उन्हें रूबरू करना है|

माँ हो सकता है बहुत पढ़ी लिखी ना हो पर मन को पढ़ना किसी भी माँ से बेहतर कोई नहीं जानता| “एक माँ वो भी समझती है जो बच्चा कहता नहीं है”-Jewish Proverb सशक्तिकरण के लिए ज्ञान और देश विदेश में हो क्या रहा है यह जानना और सही गलत में अपनी राय देनी भी आनी चाहिए|

ना- माँ- ऐसे तो नहीं चलेगा ना! थोड़ा वक्त समाचार पत्रों के लिए,टी.वी की न्यूज़ के लिए निकाले -यह जज्बा भरना होगा|जब सब मैच के बीच चाय-पकोड़ों की फरमाइश करते हैं तो संग बैठ कर जरा वो भी खुद खेल का आनंद लें|अपनी राय भी रखा करें|एक शिक्षित माँ ही अपने व अपने बच्चों के हित के लिए आवाज़ बुलंद कर सकती है और यह भावना मुझे अपनी माँ में लानी है|

7.

माँ को अपना स्वतंत्र निर्णय लेने की आदत डलवाने में मदद करें

कुछ सामाजिक व्यवस्था ऐसी बन गई है कि घर में कोई भी निर्णय पिता की मर्जी के बिना नहीं होता और यदि उन से नहीं पूछा गया तो पिता न सिर्फ विरोध जताएंगे बल्कि कहीं न कहीं उस निर्णय का उपहास भी उड़ायेंगे| कई बार परिवारों में यह भी देखा गया है कि माँ के लिए निर्णयों के खिलाफ माहौल भी बनाया जाता है व् गलत साबित होने पर बहुत खरी खोटी भी सुनाई जाती है और मन में यह बिठाया दिया जाता है कि सही निर्णय सिर्फ पुरुष ही ले पाते है क्योंकि वो श्रेष्ठ है उनको बेहतर दिमाग मिला हुआ है जबकि यह सत्य कहीं से भी नहीं है|

माँ के निर्णय हमेशा सब के हित को सोचते हुए और कोमल संवेदनशीलता से लिए हुए होते है| ऐसे में माँ के सशक्तिकरण के लिए उनके निर्णयों में साथ देना और प्रशंसा करना बहुत जरुरी है| 

8.

लोग क्या कहेंगे -इस बात की चिंता से माँ को मुक्त कराएँ

आखिर वो कौन लोग हैं जिनकी चिंता सिर्फ माँ को ही सताती है |उनके माता-पिता यानि नाना-नानी जिन्होंने विदा पर कसम की तरह ही मन में यह बात कह दी थी -कि दोनों परिवारों की यानि मायके की भी और ससुराल की भी इज्जत बनाये रखने की जिम्मेदारी अब उनके नाजुक कन्धों पर ही है|. 

अब हमारे घर की यही रीत है -के नाम पर माँ की कुर्बानी तो हर रोज होती ही है जिसमें आह करना भी मानों ससुराल पक्ष की बदनामी मान ली जाती है|नहीं-माँ को खुद पर भरोसा करके पहले वो अपने मन की आवाज़ सुनना और उस पर कायम रखने की हिम्मत देना -एक सुंदर जीवन की पहल सिखाएगा |

9.

किसी भी गलती के लिए बेवजह खुद को ही कसूरवार मानने के विचार से निकालें 

अब यह भी क्या बात हुई कि घर का कोई भी सदस्य कुछ भी गलती करे तो सीधा सवाल माँ की परवरिश पर- भला क्यों? अच्छा हो तो पिता का नाम गड़बड़ में माँ ही कसूरवार| माँ भी बिना कोई विरोध जताएं चुपचाप मान लेती हैं|

बचपन से उसे ही निभाना है यह बात जन्म से घुट्टी की तरह उनके दिलों-दिमाग में भर दी जाती है|नहीं,माँ को अपनी बात को कहने के लिए हिम्मत देना और उनका साथ देना -जिसने गलती की उसके बोलना और अपनी स्थिति को स्पष्ट करना नितांत आवश्यक है और सशक्तिकरण के लिए बेहद जरुरी है|

10.

उनकी इच्छाओं का यदि घर में कोई उपहास या उलाहना देता हो तो उनके साथ होना,दबाना नही

न जाने क्यों हमारे समाज की यह विडंबना ही है कि ससुराल में यह वाक्य लगभग हर घर में बहू को यानि हमारी माँ को गाहे-बगाहे सुनाया जाता है कि जैसे वो कितने बेकार से घर से आयीं हैं बस सारे नियम कायदे और उत्तम संस्कार तो इसी घर में ही हैं|ससुराल वाले जब किसी लड़की को यह जताते है कि उनके बेटे के लिए तो पूछों ही नहीं इतने बड़े घरों के रिश्ते आ रहे थे पर बस बेटे की पसंद के आगे झुकना पड़ा|

हर काम में नुक्स निकलाना,दिन रात अपनाने का अहसान सा जताना- माँ की आँखों की पलकों पर ठहरे आंसुओं की बूंदों को मैंने बहुत बार देखा है|मुझे अपनी माँ के नयनों में हंसी के फव्वारे देखने है,इसलिए माँ की इच्छाओं को पूरा करने में पूरा साथ देना उनके सशक्तिकरण के लिए बहुत ही ज्यादा अहम् है|

11.

माँ के शौक यानि एक नयी जिन्दगी की शुरुआत आज से ही कराने में पहल करें 

अब लो जी,माँ के हाथ के अचार,मुरब्बे,तरह तरह की चटपटी चटनी के चटकारे,दावतों में शाहीअंदाज़ में बनी बिरयानी की सुगंध और मिठाइयों में गज़ब का स्वाद-जो भी खाए उनके गुण गाता जाए|उनके हाथ के बुने स्वेटर उनकी डिजाईन सबको चकित करते हैं|माँ के गीतों में जो माधुर्यपूर्ण लय है उसे सुने हुए अरसा हो जाता है|

लगता माँ भी अपने गुणों को भूल गयी या किसी ने कभी प्रोत्साहित ही नहीं किया|पर मैं हूँ ना| चौके- चूल्हे सी निकाल उनके शौक को ही व्यवसाय बना उन्हें आत्म-निर्भर करुँगी| आत्म-सम्मान के लिए अपने द्वारा अर्जित आय का होना बेहद जरुरी है|

12.

उनकी बातों का उपहास कभी भी ना करें 

माना आप इंग्लिश बोलने में माहिर हैं क्योंकि आपको एक बढ़िया अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ाया गया है| माँ की पढाई तो पारंपरिक तौर से पढ़ने वाले स्कूल में हुई थी| आज कल छोटे-छोटे बच्चे भी कंप्यूटर चलाने में,स्मार्ट मोबाइल को कैसे इस्तेमाल करना है बखूबी जानते हैं|अब पड़ोस वाली आंटी से तुलना करना,आपको तो यह भी नहीं आता, डिजिटली पेमेंट करना भी नहीं आता तो कभी अरे घर बैठे ऑनलाइन शौपिंग किया करों न-मतलब माँ से यह सब नहीं बोलना है| 

माँ को किसी ऐसी संस्था से पूरी ट्रेनिंग का तरीका बताएं और अगली बार जब वो नयी एकदम लेटेस्ट जानकारी खुद ही पहल करके बताती हैं तो उनके चेहरे के भावों का आनंद लीजिये।

 

माँ को सशक्त करने के नायाब सुझाव

13.

मानसिक रूप से स्वस्थ होना बेहद जरुरी है 

घरों के संकीर्ण सोच से उत्पन्न घुटन भरा माहौल,सामाजिक बंधनों से जकड़ी हुई चरमराती व्यवस्था एक महिला के और खासतौर पर घर में माँ के मानसिक सेहत के लिए घातक सिद्ध होती है|परम्पराओं के नाम पर हर तरफ से घिरी माएं अक्सर मानसिक रूप से बीमार हो कर एक अवसाद या डिप्रेशन में जीती हैं | 

अभी इस विषय पर कोई समझना तो दूर,बात करना भी पसंद नहीं करता है क्योंकि एक खुशनुमा और खुले विचारों वाले वातावरण में ही तो कोई अपने मन की बात कह पायेगा|ऐसे में बच्चे अपनी माँ के दिल की बात प्यार से सुने ताकि वो यह महसूस कर पाएं कि मेरे बच्चे मुझे समझते है| यह अहसास खुद में ही बहुत सुकून देने वाला होता है|

जिस स्थान पर नारी सशक्त नहीं होती,उस स्थान को श्मशान बनने में अधिक समय नहीं लगता -मेजर मयंक विश्नोई 

14.

वार्षिक हेल्थ चेक-अप करवाएं

अक्सर जो माँ पूरे घर का इतना ध्यान रखती हैं वो अपनी सेहत को लेकर लापरवाह दिखती हैं | बच्चों की बीमारी हो या पति अस्वस्थ हों या घर का कोई ओर भी सदस्य- दिन रात सेवा में जुटी रहती है|माँ लेकिन अगर बीमार हो जाए तो फिर घर का हाल देखिये- अस्त-व्यस्त सा,हर तरफ सामान बिखरा हुआ| ऐसे में जरुरी है कि माँ का हर साल एक वार्षिक हेल्थ चेक अप कराया जाएँ ताकि समय रहते किसी भी बीमारी का उपचार हो सके|

मातृत्व एक ताउम्र का फुल टाइम काम है ऐसे में हेल्थ पर असर आता है| हर रोज मल्टीटास्किंग में झूझती माएं अपनी ओर भी ध्यान देना होता है भूल जाती है जोकि बिलकुल भी ठीक नहीं है|

15.

ऐतिहासिक नारियों की बातों की चर्चा से गर्व की अनुभूति करवाएं

घर में जब-जब ऐतिहासिक घटनाओं की बातें होती हैं और खासतौर पर हमारी महान वीरांगनाओं की ,तो माँ के चेहरे की चमक अलग नज़र आती हैं |उनमें भी एक जोश की भावना दिखाई देती है|माँ आपका नाम भी स्वर्ण अक्षरों में लिखा हुआ है घर के हर सदस्य के मन में,लेकिन आपको अपनी अच्छाइयों को बाहर भी लाना है,दिखाना है और उन पर एक अलग सोच से सबको अवगत भी करना है|

हम प्राचीन भारत की नारियों को आदर्श मानकर ही नारी का उत्थान और सशक्तिकरण कर सकते हैं|- स्वामी विवेकानंदवैदिक काल में सम्मानीय जीवन इस बात का गवाह है कि स्त्रियों का स्थान बहुत ऊँचा था| वहीँ सम्मान और गरिमा से मै अपनी माँ को जागृत करने की पूरी कोशिश करुँगी| सशक्तिकरण के लिए बहुत ही जरुरी है|🌹

 

16. 

माँ को सशक्त करने के लिए उनके प्रति कृतज्ञ भाव को अपनी भाव भंगिमा से दर्शाएँ 

सशक्तिकरण से पहले उन्हें आत्म-विश्वासी और स्वालंबी बनना होगा| उनके प्रति अपने हाव-भाव से, अपनी बोली से,अपने आचरण से, हृदय से कृतज्ञता दिखाना आवश्यक है| माँ से बढ़ कर दुनिया में कोई भी उच्च स्थान नहीं पा सकता है और ना ही कोई वो आदर व सम्मान भी| 

वो माँ ही होती है जो हमारी जरूरत से ज्यादा हंसी के पीछे छिपे गम को पहचान लेती है,मन के अच्छे बुरे सारे दुःख दर्द,पलकों पर ठहरे आंसुओं के कारण को जान लेती है और गले लगा एक पल में’ मैं हूँ न’ का भाव दे तसल्ली देती है|:ऐसी ईश्वर तुल्य जननी के लिए हमेशा हृदय में कृतग्य भाव का होना और उन्हें दर्शाना भी जरुरी है|

17.

24 *7 की ड्यूटी से उन्हें थोड़ा मुक्त करें 

माँ और उनका काम कभी सोचा कि वो तो 24 *7 अपने परिवार के प्रति पूर्णत समर्पित रहती है|

सशक्तिकरण के लिए एक बात बहुत जरुरी है कि वह खुद के लिए सोचे और उन्हें उसके लिए उनका अपना समय भी मिलें| अनगिनत कार्यों में घिरी माँ को यदि शक्तिशाली बनाना है तो उन के कार्यों में परिवार के सदस्यों की भी भागीदारी होनी चाहिए| पितृसत्तात्मक व्यवस्था में महिलों पर जिम्मेदारी और अधिकार पुरुषों ने अपने पास रख लिए| काम की पूरी सूची बना कर सब में कार्यों को बांट कर माँ को अपने लिए प्रयाप्त समय मिलें -ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए|

18.

अकेलेपन की सोच से निकालिए और उनके शौक को बढ़ावा दीजिये 

एक समय के बाद जब बच्चे बड़े होकर अपनी अपनी जिंदगियों में व्यस्त हो जाते है तो एक अकेलेपन की भावना  मन को उदास करने लगती है| कहाँ पहले ढंग से साँस लेने की भी फुर्सत नहीं होती थी और अब सारा घर एक दम वीरान और सुनसान दिखने लगता है|अरे माँ! यही तो वो सुनहरी समय आया है,जो सपनें आपने अपने लिए बुने थे- उन्हें फिर से जिन्दा करके स्वयं को एक नए रूप और रंग में ढलते हुए देखिये|

आप के नृत्य की झंकार से,आपके गले की मिठास से,आपके हाथ के बुने स्वेटर और डिजाईन किये हुए वस्त्रों से सब हमेशा प्रभावित रहें हैं| ज्यादा मत सोचिये कैसे करूँ -लोग क्या कहेंगे- अब इस उम्र में नए सिरे से कैसे कर पाऊँगी आदि -आदि|

चलिए मिलकर आपके सपनों को जगाते हैं -कुछ नया करके दिखाते हैं|

19.

माँ की सोच से सहमत न होते हुए भी अपने विचारों से प्यार से अवगत कराएँ 

माँ एक खास तरह की परवरिश में पली हैं,घर के कामों में उलझी माँ अक्सर दुनिया में क्या हो रहा है,अनजान  सी रह जाती है |जिस चाँद को साक्षी मान वो करवाचौथ पर जल अर्पित करके पिता की लम्बी उम्र की कामना करती है वहां तो अब हम स्वयं ही पंहुच गए है| देश-दुनिया की जानकारी न होने से अक्सर किसी भी चर्चा में भाग नहीं ले पाती है और सब उन्हें यह भी जता ही देते हैं अरे तुम अपना काम करों या तुम क्या करोगी जान कर|

मेरा मानना है कि दुनिया की आधी आबादी को सब कुछ जानने का हक़ है- आखिर बदलाव भी नारी ही लाती है,और जब माँ सोचती है तो घर से शुरुआत वहीँ कर पाती हैं,न तो कोई उसे रोक ही नहीं पाता है|

20.

उनकी चुप्पी को समझना और उस बात को प्रभाव शाली ढंग से रखवाने में मदद करिए

बिन कहे शब्दों में बहुत शोर होता है पर किसी को सुनाई नहीं देता या कोई सुनना ही नहीं चाहता|पिता सब समझते है पर एक आज्ञाकारी बेटे का ख़िताब लेना है| बीवी के कहने में नहीं चलता ऐसे मर्द की पहचान बनाना है परिवार और समाज को  दिखाना भी है और औरों के लिए आदर्श बन मिसाल भी बनना हैं|

घर की शांति को बनाये रखने के लिए वो अपने साथ गलत होते हुए देख कर भी चुप्पी लगा जाती है|सात फेरों के वचन सिर्फ माँ को नहीं उन्हें भी उतनी ही शिद्दत से निभाने हैं-एक बेटी ही पूरे हक़ से पूरे अधिकार से समझ सकती है क्योंकि वो अपनी जननी की चुप्पी को बखूबी जो समझती है|

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21.

माँ को भी एक छुट्टी यानि इतवार चाहिए

सुन कर अटपटा लगता है न| पर क्यों ? माँ भी एक इन्सान है और छुट्टी के दिन तो उन पर अतिरिक्त ओर बहुत सारे काम आ जाते है| बच्चों और पति देव की फरमाइश यानि सबकी छुट्टी और माँ ? न कोई छुट्टी ना कोई वेतन ना कोई तारीफ ना कोई व्यवहार से धन्यवाद का भाव,क्योंकि यह सब करना होता है कभी किसी ने सिखाया ही नहीं- खुद माँ ने भी नहीं बताया|

औरों को हमेशा थैंक यू कहना है,यह सब जानते हैं पर माँ जो घर की धुरी है उन्हें नहींमाँ कभी ऐसा नहीं चाहती ना ही उसकी कोई ऐसी इच्छा होती है पर क्या माँ को भी एक दिन का पूरा आराम नहीं दिया चाहिए ? आपका क्या ख्याल है? जरा सोचिए!

22.

माँ की टोका-टाकी को सकारात्मक रूप से लें 

माँ से भला बच्चों के लिए कौन सोच सकता है ? आजकल बच्चे लेकिन बिलकुल भी टोकाटाकी पसंद नहीं करते हैं| ऐसे में समझने की जरुरत दोनों तरह है कि बेवजह उन्हें न कुछ कहा जाए मगर बच्चों को ये बात हमेशा अपने दिलों दिमाग में बैठा लेनी चाहिए कि बात बुरी लग सकती है पर समय यह साफ बता देता है कि माँ के पास एक अंतर्दृष्टि होती है जिससे वो अपने बच्चों की भलाई को परख लेती है|

इसलिए ना कोई संदेह ना करें कोई शंका माँ का दिल तो चाहे हो सदा ही चंगा ही चंगा| 

23.

ना कहने की आदत को डलवाने में सहयोग करिए 

माँ की स्थिति घर में कुछ ऐसी होती है कि चाहे उनकी अपनी तबियत भी ख़राब हो पर वो किसी को ना नहीं कह पाती हैं| किस को कहें- दादी को बाप रे -सासू को ना कहना,बुआ को कहें -अरे कुछ दिन की मेहमान है फिर अपने घर चली जाएगी -तो वहां भी ना का सवाल नहीं,दादा जी को यानि ससुर जी के काम की अनदेखी -कैसे कहें -वो तो पिता समान हैं ,चाचा तो छोटे हैं उम्र में -पर वहां भी नहीं- मेरे बच्चे की तरह ही हैं|माँ का तो कोई टाइम-टेबल बना ही नहीं कभी| किसी को बनाने की जरुरत ही नहीं लगी| चुप रहना और ना भी कहना होता है,नहीं मालूम|मैं उनको ना कहना सिखाउंगी|

वो एक इन्सान है कोई मशीन नहीं इसका अहसास मैं घर में उनकी ढाल बन बताउंगी|मैं उनको ना कहना सिखाउंगी| वो एक इन्सान है कोई मशीन नहीं इसका अहसास मैं घर में उनकी ढाल बन बताउंगी|

24.

माँ की थाली में भी पूरा आहार हो 

माँ सुनो – एक स्वस्थ शरीर ही अपनी व् परिवार की देखभाल अच्छे से कर पाता है|बचा खुचा नहीं सबके साथ बैठ कर खाने का लुत्फ़ लिया करो माँ|अक्सर महिलाएं सबके स्वास्थ्य का ध्यान बहुत अच्छे से रखती हैं पर खुद के प्रति उदासीन रहती हैं और नतीजा कोई न कोई बीमारी भी उन्हें घेरी रहती है|

भोजन में सबसे बाद में जो बचा उसे ही प्रसाद समाज खा लेना,किसी भी परेशानी को बिलकुल भी नहीं दिखाना-एक संस्कारी व सभ्रांत परिवार की सुशील बहू के रूप में माना जाता है| माँ की थाली में भी पूरा पोष्टिक आहार हो,इसकी व्यवस्था को बनाने में ध्यान दीजिये|

25.

माँ को सशक्त कैसे करें बस घर से बाहर की दुनिया से मिलवाइए  

एक बंधे-बंधाए परिवेश में रहते-रहते कोई भी कुंठित हो सकता है और जब घर का माहौल नकारात्मक भी हो तो परिस्थितियाँ जटिल हो जाती हैं| घर से बाहर आने पर माँ न एक छोटी सी बच्ची बन जाती हैं|

पकोड़ी और गोलगप्पे खाते हुए उनका यह कहना-भईया पानी थोड़ा ओर तीखा चाहिए -बस मैं बहुत खुश होती हूँ कि माँ के अंदर की वो नन्हीं सी गुड़ियाँ कितनी मासूम और प्यारी है जिनकी हसरतें तो कोई देखना ही नहीं चाहता|पर मैं हूँ अपनी माँ की बेबाक बेटी!

माँ के सशक्तिकरण पर सुंदर विचार

 

26.

Mother’s day को मनाएं 

वैसे तो एक दिन ही मदर्स डे क्यों ? माँ के प्रति श्रद्धा भाव,उनके प्रति मृदुल आभार तो हर पल हर क्षण ही रहना चाहिए| सुबह से शाम तलक जीवन के हर मोड़ पर उन का निस्वार्थ प्यार,हर परेशानी में एक अटूट चट्टान की तरह उनका बेजोड़ साथ कहीं ढूंढे से भी नहीं मिलेगा|Mother’s day पर उनसे लाड लड़ाएं |

उनकी पसंद की कोई चीज़ बना कर खिला सकते हैं,उन्हें कोई सर प्राइज गिफ्ट दे कर हैरान होते हुए भावों को कैमरे में कैद कर सकते हैं|सुबह से शाम तक उन्हें बस आराम देकर उनके लिए कोई छोटी सी पार्टी कर सकते हैं| मतलब कुछ भी करें पर उसका अहसास जरुर नज़र आएं|

हर महिला की सफलता दूसरी महिला के लिए प्रेरणा होनी चाहिए| जब हम एक दूसरे का होंसला बढ़ाते हैं तो हम सबसे मजबूत होते हैं|-सेरेना विलियम्स 

27.

माँ के छोटे-छोटे कार्यों की प्रशंसा दिल खोल कर करिए 

सुबह से रात तक एक लम्बी कामों की फेहरिस्त माँ के पास होती है| प्राय घरों में यह ही कह दिया जाता है इसमें कौन सी नयी बात है सभी करते है और दादी तो हमेशा यह ही साबित करने में लगी रहती हैं कि उन्होंने कितना ज्यादा गृहस्थी का बोझ उठाया था| उनके समय में यह घर के कामों में मदद के लिए कोई मशीनें भी नहीं थी |कितनी अधिक मेहमानदारी थी और उस पर उतनी ही कड़क उनकी सास|पर प्यारी दादी माँ आपकी सास में और आपकी बहू की सास यानि आपमें क्या फर्क हुआ ?

जो मानसिक दबाब आपने झेला वो ही थोड़ा रूप बदल कर अपनी बहू को भी दे दिया| क्या पीढ़ी दर पीढ़ी ये गुंडागर्दी चलती रहेगी|सच में नारी ही नारी की सबसे बड़ी दुश्मन होती है| बात सच्ची है कड़वी लग सकती है|

हर महिला की सफलता दूसरी महिला के लिए प्रेरणा होनी चाहिए| जब हम एक दूसरे का होंसला बढ़ाते हैं तो हम सबसे मजबूत होते हैं|-सेरेना विलियम्स 

28.

सबको खुश करने की आदत बंद कराने में सहयोग करिए 

सबका ध्यान रखना एक बहुत अच्छी आदत है पर सिर्फ माँ के लिए ही यह क्यूँ ?याद है किसी भी काम में भूल यानि तो पूरे दिन माँ को व्यंगवाण सुनने ही है और एक अबोला सा व्यवहार बात-बात पर दर्शाया जाता था| माँ की तो बस  शामत ही शामत|

दवाई देने में समय का ध्यान,पिता के ऑफिस के लिए पूरे तरीके से खाना पैक करना और न जाने कितने सारे काम ही काम,पर माँ कब करेगी आराम ?समय को व्यवस्थित कर सबको पालन करवाने में बेटियों का साथ बहुत ही काम का है|

पापा हो या दादा या फिर हो दादी रानी 

बात कैसे मनवानी जाने यह बिटिया रानी| 

29.

रिश्तेदारों के अनावश्यक हस्तक्षेप को रोकने में उनका साथ दीजिये 

न जाने घरों में यह समस्या क्यूँ हैं? रिश्तेदारों का बिन बात बोलना,वक्त-बेवक्त अनचाही सलाह देना,जब देखो कुरेद-कुरेद कर घुमा फिरा कर घर की बातों को जानने की लालसा रखना| माँ बेचारी फँस सी जाती है क्योंकि सीधे बोल नहीं पाती| उनको डर लगता रहता है कि पापा को बुरा लग जाएगा,सब के सामने बेइज्जती करेंगे,बेकार में तमाशा बन जाएगा और सब लोग मज़े लेकर खूब घी डाल-डाल कर अपने हाथ सेंकेंगे|

बेटी या बेटों के साथ देने से पापा के साथ साथ और भी माँ को कुछ कह नहीं पाते हैं| मम्मा डरना नहीं- मैं हूँ आपके साथ!

30.

सेल्फ डिफेन्स के कोर्स में अपनी माँ को भी साथ ले जाइए 

 आज हालात कुछ ऐसे हैं कि हर माँ अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित रहती है| बस अब माँ आप और मैं मिलकर सीखेंगे और खुद की व औरों की रक्षा में भी मददगार बनेगे|घर में भी और बाहर भी सुरक्षा आज का ज्वलंत विषय है|

इस समस्या से निपटने के लिए तरह- तरह की वर्कशॉप्स,सेमिनार और छोटे छोटे कोर्स में उन्हें भी शामिल करिए और फिर देखिये उनका आत्म विश्वास और सशक्तिकरण की सुखद झलक|

महात्मा गाँधी का कथन है-’यह संभव है कि सोने को शुद्ध किया जाए,लेकिन कौन अपनी माँ को अधिक सुंदर बना सकता है?’

31.

माँ के पहनावे पर कभी भी टिप्पणी नहीं होनी चाहिए 

माँ के पहनावे पर भी बहुधा देखा है कि ससुराल पक्ष व् स्वयं पति जो उसे पसंद करने में सबके साथ था,वो भी टीका-टिप्पणी से बाज नहीं आता| हमारे घर में तो भई, तमीज से रहने की आदत शुरू से ही बच्चों में डाल दी जाती है| यह क्या गवारों जैसे रहती हो -तुम कुछ पहनने का सलीका नहीं आता क्या-तुम तो ऐसे रहती हो जैसे हम तुम्हें बहुत दुखी रखते हैं आदि-आदसारे नियम कायदे घर की महिलाओं के लिए ही हैं|

वो सर पर पल्लू रखे,निगाहें नीची रखे,बोलने की तो सोचे ही नहीं| दिन रात बंधुआ मजदुर की तरह काम करती रहे|माँ-जो खुद को अच्छा लगे आपको जिसमें आराम लगे वो पहनो और पूरे आत्म-विश्वास के साथ पहनो| मैं हूँ न साथ आपके!

32.

कभी कभी पार्लर माँ के लिए बुक करिए 

माना माँ आप बहुत ही सुंदर हो और आपको किसी भी तरह के मेकअप की जरूरत भी नहीं है|जब कभी माँ का हाथ अपने हाथों में लेती हूँ तो हाथों की नाजुकता समय की मेहनत की अपनी कहानी बयां करते हैं|चेहरे पर उम्र की हसीं लकीरें यदा-कदा दस्तक देने लगी हैं| ठीक है दादी के नुस्खें आज भी कारगार है पर पैरों की दशा बताती है कि उनकी कोमलता भी समय के भाव ने छीन ली है|

बालों पर चांदी भी आकर आराम फरमाने लगी है|माँ बहुत हुआ-छोड़ों कुछ देर को अपनी घर-गृहस्थी -आज पार्लर जाकर फेशिअल से थोडा अलग सा महसूस करवाना है|मुझे पता है माँ कभी ना करती ही नहीं- बेटी का दिल थोड़े ही दुखाना है|😀

33.

किसी NGO से सम्पर्क करवाना

माँ प्रकृति द्वारा ही उदार मना होती है| घर में सहायक व्यक्तियों की जब देखो हमेशा ही उनकी कुछ न कुछ सहायता करती रहती हैं| जब जिसे भी कोई जरुरत होती है तो निगाहें माँ की तरफ ही होती है| उनमें ही सबको एक आस एक उम्मीद की किरण दिखती है|

माँ को किसी भी तरह की NGO या किसी ओर संस्था से जोड़ सकते हैं ताकि वो खुश रहें| अपने खाली समय का सदुपयोग कर पाएं और उन्हें अपने कार्यों पर गर्व महसूस हों|

जिस स्थान पर नारी सशक्त नहीं होती,उस स्थान को श्मशान बन्ने में अधिक समय नहीं लगता -मयंक विश्नोई

34.

माँ के साथ फिर बेहतर कल होगा आस पास

यह तो बिलकुल साफ बात है कि जब घर में माँ के निर्णय माने जाते हैं तो उनमें करुणा,सवेंदना और ममता का अहसास खुद ही होता है|ईश्वर ने माँ को ये सभी नेसर्गिक गुण प्रदान किये हुए हैं| हर बात को वह दिल व् दिमाग से जांचती-परखती है काफी सोच विचार के बाद ही निर्णय लेती है| 

कल की बेहतरी के लिए,एक बहुत ही खूबसूरत समाज के लिए माँ को सशक्त बनना ही होगा और रचेगा फिर सुंदर सलोना हमारा संसार|

35.

अमृतकाल में सरकार द्वारा सशक्तिकरण की पहल 

कितनी ख़ुशी की बात है कि भारत में केन्द्रीय सरकार ने नारी सशक्तिकरण के हेतु राजनीति में उन्हें प्रमुख स्थान देने पर विचार किया है|हर महिला के सम्मान में लोकसभा में 33% योगदान अब महिलाओं को मिलेगा| यह बात ही दर्शाती है कि अब हर माँ/बेटी/पत्नी या बहन की प्रगति यात्रा अब तेजी से होगी|

नारी शक्ति वंदन अधिनियम सशक्तिकरण में मील का पत्थर सबित होगा और इस बात में कहीं भी कोई भी संदेह नहीं है|

एक कविता माँ के नाम

तुम कमज़ोर नहीं

अबला नहीं हरगिज़ हो,सबला हो हर हाल तुम
शिव की परम शक्ति,आदिशक्ति का अवतार हो तुम।

नौ देवियों के विभिन्न रूपों में हो,सर्वत्र हर दिशा व्याप्त तुम
भूली गयी हो अपनी सभी ख़ूबियाँ,पर कमज़ोर नहीं हो तुम।

उठो फिर पहचानों अपनी गरिमा,मान अपने अस्तित्व को तुम
समय की पुरज़ोर माँग है बन दुर्गा,करों संहार दुष्टों का अब तुम।

सभ्य समाज की असभ्य निगाहों को,अब बेपरदा करो तुम
रक्षक के भेष में बने भक्षको को,क़ानून के हवाले करो तुम।

पलपल न रहें ख़ौफ़ के साये में,डर से मुक़ाबला करो तुम
शिक्षा व सूझबूझ की तलवार से,हर हाल हर पल सामना करो तुम।

माँ को सशक्त कैसे करें-सुंदर ख्यालों के साथ हैं कुछ अनमोल सुझाव,जो बनायेंगे माँ को सशक्त हर हाल|आज ही अपने सबसे प्यारी माँ के सशक्तिकरण के बेमिसाल उपाय पढ़िए और अमल में लाकर उन्हें मजबूत बनाइए|

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