माँ को प्रोत्साहित कैसे करें-अगर आप के ज़ेहन में यह ख्याल आता है तो आप बिलकुल सही सोच रहें हैं और आप अपनी जननी के प्रति बेहद सवेदंनशील हैं और उन्हें आगे बढ़ते हुए देखने के लिए दिल से इच्छुक भी

जीवन की प्रथम गुरु माँ जो हर पल हमें उत्साहित करती आयीं हैं,अब हम उन्हें कैसे प्रोत्साहित यानि मोटीवेट कर सकते हैं?

एक बेटी और स्वयं एक माँ होने के नाते कुछ उम्द्दा विचार लेकर आई हूँ

माँ को प्रोत्साहित कैसे करें

माँ को कैसे प्रोत्साहित करें,उनके मन की सुनें और जज्बात खुल के बया अपने करे

माँ को प्रोत्साहित कैसे करें पर सरल 45 सुझाव

1.

ऐतिहासिक प्रेरक प्रसंग की बातों से प्रोत्साहित करें 

ब्लॉग की शुरुआत एक कहानी से करते है जो बुद्ध के जीवन से जुड़ी है। एक बार जब बुद्ध थोड़ा निराश हो जाते हैं तो उन्होंने घर वापिसी का मन बनाया।

रास्ते में लौटते  हुए एक लोमड़ी को एक तालाब में बार बार अपनी पूँछ को डालने और निकलते हुए देख ,पूछने पर वो बताती है कि इस तालाब ने पिछले साल मेरे बच्चों को ले लिया था मैं उन्हें लेने की कोशिश कर रही हूँ।बुद्ध हैरानी से कहते हैं की क्या तुम सफल हो पाओगी।जवाब बेहद लाजवाब था-मुझे नहीं मालूम -पर मैं कोशिश नहीं छोडूंगी।

बुद्ध भी फिर उत्साह से भर गए।अब माँ को भी ऐसे ही प्रोत्साहित करना है।

 

 

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2.

माँ आपके जीवन में सर्वोच्च है,यह अहसास कराना

माँ के जीवन की संघर्ष की एक ऐसी गाथा हैं जिसमें त्याग, निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा पल-पल नज़र आती है।ऐसी माँ के लिए आप के जीवन के सर्वोच्च स्थान पर वहीँ हैं यह भाव हृदय में आना,लगातार बनाये रखना और अपने सरल व्यवहार से उन तक पहुंचे भी,बहुत ही जरुरी है।

माँ के समर्पित जीवन में आप स्वयं भी उनके लिए हमेशा ही उन्हें सबसे ऊँचा दर्जा रखेंगे यह हर माँ को आनंदित कर देगा,उने अन्त्रर्मन को एक संतुष्ट भाव और प्रोत्साहित करेगा।

 

 

3.

जादू की झप्पी से माँ को प्रोत्साहित करें 

माँ का मन कोमल होता है जिसमें कई बार कोई बात चुभ भी जाती है,जिसे वो कभी दर्शाती ही नहीं है।खुद अंदर ही अंदर घुटती रहती हैं।अपनी पीड़ा को व्यक्त करना तो माँ ने सीखा ही नहीं।

बच्चें मगर समझ जाते हैं कि माँ आज उदास हैं और हो सकता है कि उन्हीं की किसी बात से दिल दुःख गया हो।पापा दादी भी कम नहीं होते हैं,तारीफ कम और आलोचना ज्यादा। ऐसे में माँ के गले में एक जादू की झप्पी काम आती है। इस पर  हुई रिसर्च इस बारें में बहुत कुछ कहती है।

 

 

4.

माँ के प्रति सकारात्मक व्यवहार दर्शाना 

जब माँ थोड़ा उदास हैं तो उस समय खास तौर पर उनके प्रति ओर ज्यादा सकारात्मक रहना जरुरी है क्योंकि कोई भी बात उनके दिल को ओर भी दुखी कर सकती है।

माँ के जीवन की संघर्ष की एक ऐसी गाथा हैं जिसमें त्याग, निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा पल-पल नज़र आती हैघर के हर सदस्य से पहले स्वयं उनको भी  self affirmation theory के द्वारा यह समझने की जरुरत करनी चाहिए ताकि सब अपनी ओर से उनके प्रति सभी सही नजरिया रख पाएं।

 

5.

उनके अच्छे कार्यों की प्रशंसा करें

माँ के कार्यों की सूची बहुत लम्बी है पर घरों में उनके अथक प्रयासों को हलके से लिया जाता है।सभी ही करते हैं इसमें ऐसा क्या खास है। बस यही सोच माँ के प्यार से किये कामों को नकारती है।

माँ के कार्यों की खुले दिल से न सिर्फ तारीफ करिए बल्कि उनके प्रति हृदय से आभार जाता कर उमंग से भरिए।

 

 

6.

मातृशक्ति के प्रति अटूट निष्ठा व् सेवाभाव दर्शाइए 

माँ का मन यदि अस्वस्थ है और कहीं न कहीं वो जीवन के प्रति उमंग और उल्लास को महसूस नहीं कर प् रहीं हैं तो उन्हें अपनी शायरी या कविताओं के माध्यम से पुन जागृत करें।बीमार तन मन कुछ बहुत सोचने उर समझने में कई बार उतना क्रियाशील नहीं रहता जैसा कि आमतौर पर अमूमन होता है।

अपनी माँ और उनकी मातृशक्ति के प्रति सुंदर उद्दगार लिखें व् ईश्वर से उनके मानसिक रूप से स्वस्थ होने की कामना करें।

मातृशक्ति के प्रति अटूट निष्ठा को सम्मान दीजिये

 

7.

माँ की गौरव गाथा का हिस्सा बनिए

हर माँ की जीवन गाथा एक संघर्ष भरी कहानी होती है,जहाँ वो अपने बचपन को छोड़ कर ताउम्र ससुराल में अजनबियों को अपना मान पूरी तन्मयता से लगी रहती हैं।परिवार और समाज उनके कार्यों को जब सराहता है तो उनसे जानना चाहिए कि कैसे उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

आखिर वो कौन सा जज्बा हैं उनमें, जो उन्हें तमाम रुकावटों के बावजूद अपने बच्चों को व खुद को सफलता दिला पाई। उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी उनको बेहद प्रोत्साहित करेगी।

 

 

8.

माँ के निर्णय में अडिगता से साथ देना

घर में पितृसत्तात्मक व्यवस्था के रहते हुए माँ की बात सही होने के वाबजूद उनके निर्णयों को गलत साबित करना एक चलन सा है।सारी जिम्मेदारियों का सफलता पूर्वक वहन करने के बाद भी माँ को जैसे कुछ आता ही नहीं- भाव बच्चों के मान में भी डाला जाता है।

अब आप बड़े हो गए हैं जीवन में अच्छे-बुरे की समझ भी बढ़ी है।माँ की बात का समर्थन करिए और बहुत जोरदार तरीके से करिए।इससे बड़ा प्रोत्साहन और क्या होगा जब अपने बच्चे उनके साथ खडें दिखाई दें।

 

 

9.

वो इस दुनिया में सबसे अच्छी माँ है ऐसा अपने व्यवहार से जताना

कई बार घर के किसी सदस्य के कुछ व्यंगात्मक रूप से बोल देने से माँ का दिल दुःख जाता है और उन्हें लगता है कि उनके अपने बच्चें भी उन्हें नहीं पूछ रहें हैं यह बात स्वयं में ही बहुत पीड़ादायक है

ऐसे में प्यार भरे व्यवहार की जरुरत होती है और बच्चों से बढ़ कर कौन उन्हें जाता सकता है कि वो ही दुनिया की सबसे अच्छी और सर्वश्रेष्ठ माँ हैं।

 

 

10.

लगातार बात करते रहें

माँ यदि अवसाद में हैं या चुप है या कुछ हतौत्साहित हैं तो उनसे किसी न किसी बहाने बात करते रहना बहुत ही आवश्यक है ताकि वो कुछ अपनी समस्या को बता सकें और उसका निदान हो सके

कई बार घरों में सबकी व्यवस्ता के चलते हुए भी सन्नाटा सा छाया रहता है जोकि ठीक नहीं है और माँ अगर हर वक्त घर में ही रहती हैं तो वो उन्हें ज्यादा खलेगा।

 

 

11.

निराशा में ही आशा छुपी है

बचपन में माँ बच्चों को प्रेरक कहानियों के माध्यम से प्रेरणा देतीं हैं तो अब बच्चों को उन कहानिओं से उन्हें नयी दिशा दिखानी हैंचींटी के लगातार प्रयास की कहानी सब जानते है तो उन्हें भी सुनाएँ,उन्हें अच्छा लगेगा।

कई बार बड़ों को भी अच्छा लगता है जब उनके बच्चे उन्हें उन्हीं की बातें बताएं।इम्पॉसिबल में ही तो पॉसिबल है न! माँ को भी आज आपकी जरूरत है।

 

 

12.

ख़राब बातों का ज़िक्र न करें

अक्सर हम यह देखे बिना कि माँ खुद ही आज कुछ सुस्त है बस अपनी परेशानियाँ ही सुनाते रहतें हैं जिससे माँ की मानसिक स्थिति और ख़राब हो सकती है। माँ के लिए बच्चे का परेशां होना या दिखाना उन्हें असहज कर देता है।

माँ को जब सुस्त देखें तो उन से किसी भी ख़राब या चुभने वाली बातें न करें। माहौल को थोड़ा सरल बना कर ही बातें ही करें।

 

 

13.

आत्मा और परमात्मा के जोड़ को ही माँ कहते है-कह कर उन्हें किसी स्पेशल नाम से पुकारना 

हर घर में सब बच्चे अपनी माँ को अलग-अलग नामों से बुलाते हैं पर किसी खास संबोधन से बुलाना माँ को भी अच्छा लगता है

बस देरी क्यों माँ को अपने किसी स्पेशल वाले नाम से पुकारें और माँ को फिर से उर्जावान बनाएं।वो इस घर की असली शक्ति हैं,अहसास कराइए

 

14.

माँ आपके जीवन में सर्वोच्च है,यह अहसास करना

कई बार जब घर के सदस्य अपने-अपने कम में व्यस्त हो जाते है और माँ को समय नहीं डे पाते हैं और ना ही इस बारें में विचार भी करते हैं तो ऐसे में माँ का दिल टूटता है।वो यह तो खूब समझती है कि सब व्यस्त है पर थोड़ा हतौत्साहित भी हो जाती हैं।

ऐसे में रात्रि भोज को एक साथ करने की परम्परा भी काफी लाभदायक रहती है। सबको नियत समय पर घर आना और मिल कर दिन बहार की बातों को एक दूजे से शेयर करने से आपसी बोन्डिंग बनती है और माँ भी हमेशा उत्साहित रहती हैं।

 

 

15.

हनुमान जी की कहानी

ऐसा कहते है कि वीर हनुमान को उनकी शक्तियों का आभास करने के लिए जामवंत जी ने कराया था क्योंकि लंका को पार करके सीता जी का पता लगाने का सामर्थ्य उन्हीं में ही था।एक अलोकिक शक्ति के स्मरण करने से ही वो फिर उर्जावान हो गए और समुद्र लाँघ गए।

ठीक इसी प्रकार माँ को फिर से याद दिलाना होगा की वो ईश्वर की सबसे योग्य कृति है जो उन्हें हर हाल में प्रोत्साहित करेगा ही।उनकी आंतरिक शक्तियों को जगाएं।

 

16.

उनकी सहनशीलता त्याग की दिल खोल कर सराहना

पितृसत्तात्मक व्यवस्था में दिन रात पूरी शिद्दत से लगने के बाद भी माँ के कामों को वो तारीफ या स्थान नहीं मिल पाता है जो उनको मिलना चाहिए।सभी करते इसमें कौन सी बड़ी बात है कह कर घर की अन्य बुजुर्ग महिलाएं भी उन्हें कमतर आंकने में लगी रहती हैं।

बच्चों के मुँह से अपने कार्यों और अपनी सहनशीलता और व्यवहार की प्रशंसा माँ के मनोबल को बहुत बढ़ाएंगी। करके देखिये जरुर।

 

 

17.

घर को एक सुकून माहौल देने की तारीफ़ करें

घर को घर जैसा सुकून भरा माहौल देने के लिए सुख शांति के वातावरण को बनाने के लिए खुले दिल से उन्हें धन्यवाद दें और अपना आभार व्यक्त करें कि आप कितने भाग्यशाली है जो उन जैसी जननी आपको मिली हैं

बच्चों के मुख से एक प्यार भरा शब्द भी माँ के लिए बेहद कीमती सौगात की तरह लगता है कि उनके बच्चे कितना समजते हैं और उन्हें चाहते हैं।इससे बढ़ कर और क्या प्रोत्साहन हो सकता है?

 

 

18.

अकेलापन स्वयं में एक बीमारी

बच्चे अपने अपने कामों में व्यस्त और पति भी व्यस्त कई बार बच्चों की शादी करने के बाद भी माँ के जीवन में एक अकेलापन सा आ जाता है। अकेलापन स्वयं में एक बीमारी बन जाती है यदि कोई शौक या खुद को व्यस्त करने का कोई ओर जरिया न हो।

जरूरत इस बात की है कि यह अंदाज़ा लगाया जाए कि अकेले रहने पर माँ खुश है या नहीं।उन्हें व्यस्त रहने के तरीके निकले जाएँ।

 

मां को प्रोत्साहित करने के अनमोल तरीके

 

19.

माँ को उनके जीवन के लक्ष्य याद दिलाएँ

माँ से बढ़ कर किसी भी बच्चे की जिन्दगी में कौन हो सकता है जो उन्हें लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जी-जान से जुटी रहती हैं।दिन या रात फिर एक से ही हो जाते हैं। एक धुन सी लग जाती है कि कैसे वो अपने बच्चों के लक्ष्य को पूरा कर पाएं।

 माँ के जीवन के लक्ष्य -क्या किसी ने कभी जानना चाहा कि माँ अपने स्वप्निल नयनों में किस ख्वाब को सजाये हुई थी।कितना अच्छा लगेगा जब आप माँ के लक्ष्य जान कर उसे भी अपने जीवन का मकसद बना लेंगे।

 

20.

उनके शौक को पूरा करने में मदद करना 

हर व्यक्ति के अपने कुछ न कुछ निजी शौक होते ही हैं पर बहुधा उनके लिए समय की कमी या पैसे की कमी या फिर कई बार ध्यान भी नहीं जाता है। बच्चों से ही माँ का सम्पर्क सबसे ज्यादा होता है तो बच्चे ही इसमें सबसे ज्यादा सहायक भी सिद्ध होते हैं।

घर बैठे-बैठे भी अब कई काम किये जा सकते हैं। अचार- मुरब्बे,टिफिन सर्विस,सिलाई बुनाई के कामों को व्यवसाय का रूप दे सकते है।

 

21.

रचनात्मक कार्यों में व्यस्त करें

यदि माँ को पढने लिखने का शौक है तो उन्हें उत्साहित करिए कि वो कविताएँ,शायरी या कहानियां लिख सकती है और छपवा भी सकती हैं।बहुत सारे एप्प्स अब मोबाइल पर ही उपलब्ध है जिसमें घर पर ही रह कर वो अपने इस शौक को पूरा कर सकती हैं।

एक माँ की भूमिका में जो शानदार कार्य उन्होंने किये थे वो एक लेखिका,शायर या कवियित्री के रूप में भी प्रतिष्ठित हो जाएँगी।कितना अच्छा लगेगा उन्हें भी और बच्चों को भी।

 

22.

उनको कुछ नया सिखाने के लिए तैयार करना

आप जब छोटे से बच्चे थे तब माँ ने कितने जतन से आपको अ या A सिखाया था,कभी वो हिम्मत नहीं हारी और कुछ न कुछ आपको नया सिखाने को आतुर दिखतीं थी।

बस अब आपको अपनी माँ को कुछ नया सिखाने के लिए उसी प्रेम वाले जज्बे से तैयार करना है और जीजान से उनके साथ जुट जाना भी है।

 

24.

डिजिटल दुनिया से दोस्ती करा दीजिये 

आज की इस दुनिया में ऑनलाइन से ही सारे कार्य हो रहे हैं।माँ अगर ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं पर कुछ नया जानने में बहुत इच्छुक रहती हैं तो बस इस अलबेली टेक्निक से उन्हें भी प्यार हो जाएगा।हा उन्हें थोड़ा ज्यादा देना होगा।आसपास कोई यदि सिखाने की क्लासेज का प्रबंध हो जाए तो बल्ले- बल्ले।

एक स्मार्ट फ़ोन उन्हें गिफ्ट करिए और घर बैठे कैसे सब कुछ मंगवाया जा सकता है,बताइए और आराम के एक नयी व्यवस्था का इंतजाम करिए।

 

 

25.

मन न होते हुए भी उनकी बात को नहीं टालना है

यूँ तो माँ बहुत अच्छे से जानतीं है कि उनके परिवार और बच्चों के लिए क्या हितकारी है और क्या नहीं है पर फिर भी परिस्थितियाँ कई बार ऐसी बन जाती हैं किकठोर निर्णय लेने पड़ जाते हैं।

ऐसे में बजाय बुरा मानने के माँ की मनस्थिति को समझना जरुरी है और न होते हुए भी माँ की बात को टालना नहीं है यह व्यवहार माँ को प्रोत्साहित करेगा की उनके बच्चे उन्हें खूब समझते हैं।

 

 

26.

वो इस दुनिया में सबसे अच्छी माँ है ऐसा अपने व्यवहार से जताना

कई बार घर के किसी सदस्य के कुछ व्यंगात्मक रूप से बोल देने से माँ का दिल दुःख जाता है और उन्हें लगता है कि उनके अपने बच्चें भी उन्हें नहीं पूछ रहें हैं यह बात स्वयं में ही बहुत पीड़ादायक है

ऐसे में प्यार भरे व्यवहार की जरुरत होती है और बच्चों से बढ़ कर कौन उन्हें जाता सकता है कि वो ही दुनिया की सबसे अच्छी और सर्वश्रेष्ठ माँ हैं।

 

 

27.

उनके सपनों को साकार करने में सोचना और तरीके निकलना

माँ एक स्त्री हैं और उससे पहले एक नन्हीं सी लड़की भी हुआ करती थी। उनके ढेरों सपनें भी थे जो घर की जिम्मेदारियों को पूरा करने में कहीं पीछे छूट गए।उनके क्या सपने थे जो पूरे नहीं हुए,मनोयोग से पूछना

उनके सपनों की जानकारी लेकर,कैसे उन्हें पूरा करने के रास्ते निकालें,यह बात ही उन्हें जीवन के प्रति एक नयी उमंग से भर देगी।

 

 

28.

वो ईश्वर का सर्वोत्तम उपहार हैं,यह महसूस कराएँ

ईश्वर हमें बहुत सारे उपहारों से नवाजता है पर हम अक्सर उन्हें कभी धन्यवाद भी नहीं देते और एक शिकायत सी करते रहते हैं।माँ के रूप में भगवन ने जो सबसे उत्तम और सर्वोच्च उपहार दिया है उसे भी नहीं सोच पाते हैं। माँ के बिना जीवन की कल्पना डराती है क्या कभी ऐसे सोचा है?

न सिर्फ इसे हृदय से मानिए बल्कि माँ को भी अपने खूबसूरत जज्बातों से रूबरू करना चाहिए ताकि वो हमेशा यह सोच कर प्रोत्साहित रहें कि वो भी कितनी भाग्यशाली है जो ऐसे अनमोल बच्चें मिलें है।

 

 

29.

पूजा स्थल में उनके साथ जाएँ

कई बार घरों में धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग तरह की होती हैं ऐसे में अगर पुरुष वर्ग पूजा पाठ को पसंद नहीं करते हैं तो महिलाओं को भी करने में भय व् संकोच होता हैबच्चे ऐसे में जब छोटे होते हैं तो कुछ कहने या करने की स्थिति में नहीं होते हैं

अगर माँ को पूजा करके आत्मसंतोष मिलता है तो इसमें बुराई क्या है?कर्मकांडों से बचना चाहिए पर परम शक्ति में विश्वास तो अटूट होना ही चाहिए।माँ के साथ जायेंगे तो उन्हें बहुत ही अच्छा लगेगा।

 

 

30.

अपने उत्तम कार्यों से उन्हें सम्मानित करें

किसी भी माँ के लिए वो क्षण बेहद गर्व भरा होता है जब उनकी संतान की तारीफ या सम्मान घर,परिवार और समाज देता है। माँ की परवरिश उसी पल सफल हो जाती है जब any सभी लोग मुक्त कंठ से सराहना करते हैं।

अपने कार्यों को इतने सुंदर ढंग सी करें कि माँ का मस्तक गौरव से ऊँचा हो जाएँ।इससे बढ़ा प्रोत्साहन किसी भी माँ के लिए हो ही नहीं सकता।

 

 

31.

उनके जीवन के संस्मरण सुनना 

जीवन तो खट्टे-मीठे अनुभवों से भरा है।माँ के जीवन के सुंदर पलों को सुनिए और उनके चहकते हुए हावभाव को भी देखिये और साथ में जब जब कठिन दौर आया तो कैसे वो उस कठिनाई से निकली वो भी ध्यान से सुनें।

बच्चों को ऐसे शानदार कार्य करने चाहिए ताकि उनकी जिन्दगी में ज्यादा  सुख आए और अपने पोते-नाती को गर्व से बताने में सुख महसूस करें।

 

 

32.

उनके द्वारा दी गई अच्छी बातों को दोहराएँ

उनके द्वारा हर दी या किसी भी मौकों पर तरह तरह की सलाह या कोई न कोई कहावतें या any लोहों की जिन्दगी के किस्से सुनने को मिलते रहते है। यह किसी को भी मालूम नहीं है कि कब किस समय पर बताई गयी या समझाई गई बात संजीवनी बूटी का काम कर जाएँ।

एक बेहतर जीवन को जीने के लिए उनकी कही बातों को अपने ज़ेहन में गांठ की तरह बांध ले।

 

 

33.

नाना नानी की बातें उनकी सहेलियों के बारे में उन्हे बताने के लिए कहना

माँ के माँ पापा यानि आपके नाना जी और नानी जी मौसी और मामा उनके जन्म के साथी है जिन्हें ईश्वर ने एक साथ एक घर में बसाया।उसी ज़माने में उनकी बहत सारी सहेलियां भी रहीं होंगी।

तो क्यों न रात्रि भोज के बाद उनके जीवन के मधुर तारों को छेड़ा जाएँ और उन्हें उस स्वप्निल ख्वाबों में जाने दिया जाएँ जहाँ वो सबसे ज्यादा खुश रहती थी।माँ की जिन्दगी में उत्साह खुदबखुद ही बढ़ जाएगा।

 

 

अपनी फरमाइशों के लिए दबाव नहीं बनाना 

बच्चे या कोई भी घर का सदस्य कई बार जाने-अनजाने अपनी फरमाइश पूरी करने की जिद सी पकड़ लेते हैं।माँ को ना करने की आदत नहीं होती है और उस काम को करने में दिक्कत भी हो राही है पर कह नहीं पाती हैं।

माँ के हाव-भाव से समझ लेना चाहिए की उस फरमाइश से माँ पर एक दवाब आ रहा है और ऐसे में उन्हें बार बार न कह कर स्वयं ही उस कार्य को अपने हाथ में ले लेना चाहिए।

 

 

34.

उनके हाथ से बने व्यंजनों को स्वाद से खाना और तारीफ करते रहना

दुनिया के सबसे बढ़िया शेफ से भी अगर उनके राज जानना चाहेंगे तो वो अपनी ननि दादी या माँ के हाथों की बने व्यंजनों की विधि को बताएँगे।

आपके पास भी वो ही शेफ यानि आपकी अपनी मम्मी हैं न! बस नए नए स्वादिष्ट चीजों को खाइए और तृप्त मन से ईश्वर को धन्यवाद दें कि उन्होंने आपको कितने खूबसूरत उपहार से नवाजा है।

 

 

35.

उनके बचपन की बातों में रुचि लेकर सुनना

हर व्यक्ति को अपना बचपन ताउम्र याद रहता है। माँ ने उसी नादान नटखट बचपन को आपमें में जिन्दा रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

जब मौका मिले नहीं,मौका बनाइए और उनके बचपन की बातों में अपनी रूचि दिखाइए और फिर माँ को एक छोटी सी प्यारी बच्ची के रूप में देख कर उनकी उदासी भगाइए,जीवन के प्रति उसी शैतानी वाले रूप को जगाइए।

 

36.

अपनी जिम्मेदारियों से उन्हें मुक्त करना यानी अपने काम स्वयं करना

सच में माँ को प्रोत्साहित करना चाहते हैं तो अपने हिस्से वाले कामों से उन्हें मुक्त करिए। बच्चे जब अपने सब कामों को सही तरीके से करते हैं तो माँ को बहुत अच्छा लगता है कि उनके बच्चे आगे चाल कर किसी पर निर्भर नहीं होंगे और एक सुंदर जीवन व्यतीत कर पायेंगे।

स्वयं को व्यवस्थित करना व् सही समय पर सही ढंग से करना एक कला है और माँ को गर्व महसूस होता है कि उन्होंने सही तरीके से बच्चों को सिखाया था।

 

 

माँ को कैसे प्रोत्साहित कैसे करें-कुछ अनोखें सुझाव

 

37.

घर के कामों में आगे बढ़ कर सहयोग देना 

घर में ऐसा क्यों होता है कि सारे कार्यों की जिम्मेदारियां माँ के हिस्से में ही आती हैं? अलसुबह से रात तलक वो सबकी इच्छाओं का ध्यान रखती हैं और सबकी नाराजगी भी वो ही झेलती हैं। क्या यह सही लगता है?

नहीं न! तो सारे कामों को क्यों नहीं मिलकर बांटने की बात होती है? चुपचाप सबके लिए त्याग भावना से अनवरत काम करते रहना उनकी नियति सी बन गई है।आगे बढिए जिम्मेदारी लीजिये और उन्हें भी आराम दीजिये।

 

 

38.

घर से बाहर किसी न किसी वजह से ले जाना और आइस क्रीम/चाट गोलगप्पे खिलाना

बात पढने व सुनने में छोटी सी लग सकती है पर इसका असर बड़ा है।जीवन की खुशियाँ बहुधा रोजमर्रा की बातों में ही बसी हैं।

बस उदासी को दूर भागने के लिए बहाने से उन्हें बाहर ले जाएँ और उनकी पसंद की चाट पकोड़ी या गोलगप्पे या ठंडी-ठंडी आइसक्रीम खिलाए व् बच्चों जैसी मासूमियत उनके चेहरे पर देखिये।

 

 

39.

अपनी पसंद के व्यंजन की फ़रमाइश करें,उन्हें अच्छा लगेगा

कई बार लगता है कि अपनी फरमाइश बता कर माँ को बेवजह परेशां करना होगा जबकि वास्तविकता इससे बिलकुल उलटी है।माँ की जिन्दगी तो उनके बच्चों के इर्दगिर्द ही घूमती है।

हर रोज नहीं पर यदा- कदा आप उन्हें कुछ बनाने को कहिए और बताये कि बहुत दिन से आपके हाथ का बना हलुआ या कुछ खाया ही नहीं,बस माँ की फुर्ती देखने लायक होगी।वो एकदम से अपने लाडले बच्चों की इच्छा पूरी करने में जुट जाएँगी।

 

 

40.

कभी कभी पूरी परिवार के साथ भी मूवी और बाहर से  ही रात्रि भोज करके आना भेजना

यूँ तो सभी एकसाथ एक ही परिवार में रहतें हैं पर जब मिलकर संग में किसी पिक्चर या नाटक या शौपिंग के लिए जाते हैं और फिर एक साथ कहीं न कहीं खा पीकर आते हैं तो एक अलग तरह का जुड़ाव भी बनता है।

कुछ देर के लिए समस्यों को दरकिनार करके संग-संग घूमना-फिरना भी माँ को प्रोत्साहित करता है।तो बस आज की कोई प्रोग्राम बनाइए।

 

 

41.

कैंडल नाइट डिनर का इंतजाम करके उन्हे सर प्राइज देना

कभी कभी छोटी छोटी सी ख़ुशी भी अपर आनंद की अनुभूति करा देती हैं। बाहर क्यूँ जाना बस बच्चें मिल कर छत के किसी कोने पर,आँगन के विशाल पेड़ के नीचे या रसोई के एक ओर या घर की किसी भी भाग में एक कैंडल नाईट डिनर का इंतजाम कर सकते हैं।

उस दिन माँ की पसंद का खाना ही बनाएं और माँ की तरह प्यार से उन्हें परोसे।बस फिर ख़ुशी से दमकते चेहरे की रनौक को कैमरे में कैद कर लें।

 

 

42.

रिश्तेदारों के स्वागत व आवभगत में उनके साथ लगे रहना 

घर बार में रिश्तेदारों का आना जाना तो लगा ही रहता है। माँ के साथ आवभगत के तौर तरीके सीखें और सामाजिक प्राणी होने का कर्तव्य भी बढ़ कर निभाएं।

पारिवारिक संबंधो में रिश्तेदार कभी अच्छी तो कभी आपसी रिश्तों में अलगाव या कड़वाहट भी पैदा कर देते हैं।माँ का अनुसरण करें और अगर कोई आपस में फूट डलवाने की कोशिश करे तो सावधान रह कर अपनी माँ का ही साथ दें।

 

 

43.

 माँ की पसंद की चीज़े उपहार में दें

माँ परिवार में न सिर्फ बच्चों को अपितु सभी सदस्यों को समय के अनुसार तोहफे देती रहती हैं,उन्हेनाच्चा लगता हैं यह सब अपने लोगों के लिए करते हुए।पर क्या यह सिर्फ एकतरफा ही चलता रहेगा?

नहीं,इस बार उन्हें तोहफे देकर और वो भी उनकी ही पसंद के दे कर देखिये कि वो कितनी खुश होंगी जैसे कि उन्हें मानों कोई खज़ाना मिल गया हो।

 

 

44.

स्वयं एक दिन के लिए माँ बन के देखिये

एक दिन जरा स्वयं माँ बन जाइए।उनके जागने से पहले उठ कर काम में लग कर सारे कामों की सूची बना कर शुरू करिए।नाश्ते को ठीक उनकी तरह से ही जैसे आप जब सुस्त होते हो और वो अपने हाथों से मनुहार करके खिलाती है,बस वैसे ही आज अपने हाथों से माँ को खिलायेगा।

इससे सुंदर दृश्य और क्या हो सकता है कि बच्चे माँ की भूमिका में हों और माँ खुद एक छोटी सी बच्ची बनी हो।माँ प्रफ्फुलित हो उठेंगी।

 

 

45.

घर के पालतू जानवरों से प्यार करें 

माँ स्वाभाविक रूप से करुणामयी होती हैं और न सिर्फ घर के अंदर रहने वाले जानवरों से सहानुभूति रखती है बल्कि सारे जगत में अपनी ममतामयी रूप से सब को स्नेह से बांधे रखती हैं।माँ के साथ आप भी ध्यान करें कि कब पालतू जानवरों को खाना खिलाना है,कब उन्हें बाहर ले जाना है।

माँ कई बार कहीं जाती ही नहीं कि उनकी अनुपस्थिति में कौन उनके मूक पशु का ध्यान रखेगा। बस माँ को इतना भरोसा होना चाहिए कि उनके बच्चें हैं न,ख्याल रखने के लिए।

एक सुंदर कविता माँ के लिए

“माँ तुम गौहरे-नायाब हो”

आफ़ताब हो,महताब हो
हर श्वास का मधुर राग हो।
हर ख़ुशी का तुम्ही सुंदर ख़्वाब हो
थिरकन में मेरी घुँघरू की आवाज़ हो।

ईश्वर नहीं रह सकता,इस धरा पर हर जगह
अपनी प्रतिमूर्ति बना भेजा,सबसे सुंदर तुम्हीं ख़ास उपहार हो।
दुनिया बेगानी हर कोई ग़ैर सा लगे
उमंग की हिलोरें लिए,एक ख़ूबसूरत अहसास हो।

प्रेरक,जीवनदायिनी व गमग़ुसार रहीं है आप
माँ सच में जहाँ की,तुम ही गौहरे-नायाब हो।

आफ़ताब=सूरज। महताब =चाँद। गमग़ुसार=हमदर्द
गौहरे-नायाब= दुर्लभ मोती

माँ को कैसे प्रोत्साहित करें-हर क्षण बच्चे की ऊँगली पकड़ कर चलती माँ के जीवन में कभी उदासी या परेशानी लगे तो बढ़ कर ऐसा क्या करें की उनके चेहरे की रौनक लौट आएं तो कुछ माँ के होंसलें के लिए बेहद खास उपाय पढ़िए और COMMENT BOX में अपनी राय भी लिखिए।